श्रीराम नीलामेघम को यूनिवर्सिटी एट बफेलो में SUNY डिस्टिंगुइशेड प्रोफेसर नामित किया गया है। / Buffalo.edu
भारतीय मूल के वैज्ञानिक श्रीराम नीलमेघम को अमेरिका के स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूयॉर्क (SUNY) की सर्वोच्च फैकल्टी उपाधि से सम्मानित किया गया है। भारतीय मूल के वैज्ञानिक और यूनिवर्सिटी एट बफेलो (UB) के प्रोफेसर श्रीराम नीलमेघम को स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूयॉर्क (SUNY) का 'डिस्टिंगुइशेड प्रोफेसर' नियुक्त किया गया है।
यह SUNY प्रणाली में शिक्षकों को दिया जाने वाला सर्वोच्च शैक्षणिक सम्मान है। इस नियुक्ति को 28 अप्रैल को हुई SUNY बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की बैठक में मंजूरी दी गई। विश्वविद्यालय के अनुसार यह सम्मान इंजीनियरिंग, जैव-चिकित्सा अनुसंधान (बायोमेडिकल रिसर्च) और शिक्षा के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए दिया गया है।
श्रीराम नीलमेघम ने 1991 में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) से केमिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वे अमेरिका चले गए जहां उन्होंने राइस यूनिवर्सिटी से बायोइंजीनियरिंग में विशेषज्ञता के साथ केमिकल इंजीनियरिंग में पीएचडी की। बाद में उन्होंने बेलर कॉलेज ऑफ मेडिसिन में पोस्टडॉक्टोरल शोध भी किया। यूनिवर्सिटी एट बफेलो से जुड़ने के बाद श्रीराम नीलमेघम ने सिस्टम्स ग्लाइकोबायोलॉजी के क्षेत्र में खुद को एक प्रमुख शोधकर्ता के रूप में स्थापित किया।
यह एक बहु-विषयक वैज्ञानिक क्षेत्र है जिसमें यह अध्ययन किया जाता है कि कोशिकाएं ग्लाइकैन नामक जटिल शर्करा अणुओं का निर्माण और नियंत्रण कैसे करती हैं। उनका शोध इंजीनियरिंग और चिकित्सा विज्ञान के बीच सेतु का काम करता है और इससे सूजन संबंधी बीमारियों, रक्त के थक्के बनने से जुड़े विकारों, कैंसर और वायरल संक्रमणों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिली है।
उनकी प्रयोगशाला में मॉलिक्यूलर, सेलुलर और टिश्यू इंजीनियरिंग तकनीकों का उपयोग कर जैव-चिकित्सा अनुसंधान किया जाता है। उनकी टीम विशेष रूप से यह अध्ययन करती है कि श्वेत रक्त कोशिकाएं (व्हाइट ब्लड सेल्स) और प्लेटलेट्स सूजन के दौरान रक्त वाहिकाओं के साथ किस प्रकार प्रतिक्रिया करते हैं।
हाल के वर्षों में उनका शोध ग्लाइकैन की मानव रोगों में भूमिका और बेहतर जांच (डायग्नोसिस) तथा उपचार विकसित करने की संभावनाओं पर केंद्रित रहा है। विश्वविद्यालय के अनुसार श्रीराम नीलमेघम 136 शोध-पत्र प्रकाशित कर चुके हैं, 12 पुस्तक अध्याय लिख चुके हैं और उनके नाम अमेरिका के 10 पेटेंट दर्ज हैं। उन्होंने यूनिवर्सिटी एट बफेलो में लगभग 2 करोड़ डॉलर (करीब 170 करोड़ रुपये) का शोध अनुदान (रिसर्च फंडिंग) प्राप्त किया है।
इसमें अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ (NIH) की तीन R01 रिसर्च ग्रांट्स भी शामिल हैं। उन्होंने दर्जनों स्नातकोत्तर (मास्टर्स) और पीएचडी छात्रों के साथ-साथ कई पोस्टडॉक्टोरल शोधकर्ताओं का मार्गदर्शन भी किया है।
श्रीराम नीलमेघम अमेरिकन इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल एंड बायोलॉजिकल इंजीनियरिंग और बायोमेडिकल इंजीनियरिंग सोसाइटी के निर्वाचित फेलो भी हैं। इसके अलावा वे यूनिवर्सिटी एट बफ़ेलो के बायोमेडिकल इंजीनियरिंग और मेडिसिन विभागों में भी अतिरिक्त जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।
इस वर्ष यूनिवर्सिटी एट बफेलो के आठ प्रोफेसरों को SUNY डिस्टिंगुइशेड प्रोफेसर का सम्मान दिया गया। अन्य सम्मानित शिक्षकों में जोसेफ बाल्थासर, सुजैन डिकरसन, लियोनार्ड एगेडे, थॉमस फीली, मेलानी ग्रीन, मारिया क्राइमर और पॉलीन मेंडोला शामिल हैं। वहीं क्रिस्टोफर होलिस्टर को SUNY डिस्टिंगुइशेड लाइब्रेरियन के सम्मान से नवाजा गया।
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