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अमेरिकन ड्रीम को फिर से जिंदा करने का समय कमला हैरिस

कमला हैरिस ने कहा कि अब समय आ गया है कि अमेरिकन ड्रीम को फिर से जिंदा किया जाए। ऐसा सपना जहां एक हफ्ते की मेहनत से आप अपनी जरूरतें पूरी कर सकें जैसे खाना, बिजली और बाकी जरूरी खर्च।

कमला हैरिस / X/ @ArkDems

अमेरिका की पूर्व उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने अमेरिकन ड्रीम को फिर से जिंदा करने की जरूरत पर जोर दिया और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दौर की राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था की कड़ी आलोचना की।

उन्होंने यह बात अर्कांसस की डेमोक्रेटिक पार्टी द्वारा आयोजित फिशर शैकलफोर्ड डिनर में मुख्य भाषण देते हुए कही। यह लिटिल रॉक में आयोजित हुआ था।

कमला हैरिस ने कहा कि अब समय आ गया है कि अमेरिकन ड्रीम को फिर से जिंदा किया जाए। ऐसा सपना जहां एक हफ्ते की मेहनत से आप अपनी जरूरतें पूरी कर सकें जैसे खाना, बिजली और बाकी जरूरी खर्च। जहां मेहनत के साथ आप परिवार के साथ समय बिता सकें, घर खरीद सकें और कभी-कभी छुट्टी पर भी जा सकें।

यह भाषण 2024 के चुनाव के बाद उनका एक बड़ा राजनीतिक संबोधन माना जा रहा है जिसमें डेमोक्रेटिक पार्टी रिपब्लिकन प्रभाव वाले राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

हैरिस ने अपने भाषण को सीधी बात बताते हुए कहा कि अमेरिका आज ऐसी आर्थिक व्यवस्था का सामना कर रहा है जो कामकाजी लोगों के लिए काम नहीं कर रही बल्कि यह एक झुकी हुई राजनीतिक व्यवस्था और कमजोर होती नागरिक व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि इससे लोगों में गुस्सा, निराशा, विभाजन और अलगाव बढ़ा है।

उन्होंने इस स्थिति के लिए कई दशकों की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया जिनमें व्यापार समझौते, वित्तीय नियमों में ढील और बढ़ती महंगाई शामिल है खासतौर पर घर, स्वास्थ्य सेवा और बच्चों की देखभाल की लागत।

हैरिस ने कहा कि दोनों पार्टियों के नेताओं ने ऐसी आर्थिक सोच को बढ़ावा दिया जो अब गलत साबित हो चुकी है और कई लोगों के लिए अमेरिकन ड्रीम अब एक मिथक बन गया है।

राजनीति पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि बड़े पैसों का प्रभाव वॉशिंगटन के अंदरूनी लोगों का दबदबा और सोशल मीडिया के एल्गोरिदम समाज में गुस्सा और विभाजन बढ़ा रहे हैं।

उन्होंने ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने इस कमजोर व्यवस्था का फायदा उठाया और वह समस्या का कारण भी हैं और उसी का नतीजा भी। हैरिस ने आरोप लगाया कि ट्रंप प्रशासन की नीतियों ने टैरिफ के जरिए खर्च बढ़ाया, अमीरों को टैक्स में राहत दी और आम लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं में कटौती की।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन लोकतांत्रिक भागीदारी को कम करने और जवाबदेही से बचने की कोशिश कर रहा है जिसमें मेल-इन वोटिंग और संस्थानों जैसे न्यायपालिका, विश्वविद्यालय, व्यवसाय और मीडिया पर हमले शामिल हैं।

विदेश नीति पर उन्होंने कहा कि ट्रंप ने चुनाव की नहीं बल्कि अपनी पसंद की लड़ाई शुरू की जिससे सैकड़ों अरब डॉलर का खर्च हुआ और खाने-पीने व ईंधन की कीमतें बढ़ीं।

राज्य स्तर पर उन्होंने अर्कांसस की नीतियों की भी आलोचना की, जिसमें शिक्षा और चाइल्डकेयर फंडिंग में कटौती शामिल है। हैरिस ने कहा कि यह समस्या सिर्फ एक नेता तक सीमित नहीं है। जिस सिस्टम ने उन्हें पैदा किया उसकी कोई समय सीमा नहीं है उन्होंने चेतावनी दी।

उन्होंने अपने लिटिल रॉक सेंट्रल हाई स्कूल दौरे और लिटिल रॉक नाइन की सदस्य एलिजाबेथ एकफोर्ड से मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा कि इतिहास को याद रखना जरूरी है लेकिन भविष्य के लिए उम्मीद भी बनाए रखनी चाहिए।

आगे की बात करते हुए उन्होंने कहा कि मिडटर्म चुनाव सात महीने से भी कम समय में हैं लेकिन असली बदलाव के लिए लगातार प्रयास जरूरी होंगे। उन्होंने सस्ती हाउसिंग, बेहतर स्वास्थ्य सेवा, चाइल्डकेयर, शिक्षा सुधार, टैक्स सुधार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व सोशल मीडिया के नियमन को प्राथमिकताएं बताया। 

अपने भाषण के अंत में उन्होंने कहा कि जब हम लड़ते हैं, तो हम जीतते हैं।

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