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जन्मसिद्ध नागरिकता पर सुनवाई से पहले भारतीय मूल के नेताओं ने कही ये बातें

यह सुनवाई इस बात पर केंद्रित है कि क्या अमेरिका में जन्मे उन बच्चों को नागरिकता मिलेगी या नहीं जिनके माता-पिता अवैध रूप से या अस्थायी तौर पर वहां रह रहे हैं।

 जन्मसिद्ध नागरिकता आदेश जन्मसिद्ध नागरिकता आदेश / NPR

अमेरिका में जन्मसिद्ध नागरिकता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई से पहले भारतीय मूल के नेताओं और संगठनों ने इसका समर्थन किया है। यह मामला पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस आदेश से जुड़ा है जिसमें जन्म से मिलने वाली नागरिकता को सीमित करने की कोशिश की गई है।



कांग्रेस सदस्य रो खन्ना ने इस पर कहा है कि यह मुद्दा उनके लिए व्यक्तिगत रूप से बहुत अहम है। उन्होंने बताया कि उनका जन्म 1976 में फिलाडेल्फिया में हुआ था और उनके माता-पिता प्रवासी थे। उन्होंने कहा भले ही मेरे माता-पिता इस आदेश से सीधे प्रभावित नहीं होते लेकिन यह मेरे लिए बहुत निजी मामला है। मेरे माता-पिता अक्सर कहते थे कि अमेरिका में जन्म लेना किसी लॉटरी जीतने जैसा है।

रो खन्ना ने 1898 के एक सुप्रीम कोर्ट फैसले का भी जिक्र किया। उस फैसले में कहा गया था कि अमेरिका में जन्म लेने वाला बच्चा नागरिक होगा। भले ही उसके माता-पिता प्रवासी हों। खन्ना ने ये भी कहा कि उस समय चीन विरोधी माहौल था और अब कुछ लोग फिर से वैसी ही सोच लाना चाहते हैं।



ऐसे ही कांग्रेस सदस्य प्रमिला जयपाल ने कहा कि राष्ट्रपति यह तय नहीं कर सकते कि कौन नागरिक होगा। यह संविधान तय करता है। अगर कोई अमेरिका में जन्म लेता है, तो वह नागरिक है।



कांग्रेस सदस्य श्री थानेदार ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा मैं खुद एक प्रवासी हूं। यह मुद्दा मेरे लिए भी व्यक्तिगत है। संविधान साफ कहता है कि प्रवासियों के बच्चों को नागरिकता मिलेगी। कोई भी राष्ट्रपति संविधान नहीं बदल सकता।



वहीं भारतीय मूल के संगठन इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट ने भी इस आदेश की आलोचना की। संगठन ने इसे संविधान और जन्मसिद्ध नागरिकता पर सीधा हमला बताया। संगठन के प्रमुख चिंतन पटेल ने कहा कि यह कदम बहुत खतरनाक है। उन्होंने कहा कि यह संविधान में बदलाव करने की कोशिश है और इससे प्रवासी परिवारों पर बड़ा असर पड़ेगा।

पटेल ने बताया कि कई भारतीय परिवार लंबे समय से वीजा और ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हैं। अगर यह नियम लागू होता है, तो उनके बच्चों की स्थिति अनिश्चित हो सकती है। हम उन सभी संगठनों के साथ खड़े हैं जो प्रवासियों के अधिकारों की रक्षा कर रहे हैं। पटेल ने यह भी कहा कि हम हमेशा से यहां के हैं और रहेंगे। 

आपको बता दें कि यह मामला ट्रंप बनाम बारबरा के नाम से चल रहा है। इसमें सरकार जन्मसिद्ध नागरिकता के दायरे को सीमित करना चाहती है। यह सुनवाई इस बात पर केंद्रित है कि क्या अमेरिका में जन्मे उन बच्चों को नागरिकता मिलेगी या नहीं जिनके माता-पिता अवैध रूप से या अस्थायी तौर पर वहां रह रहे हैं। इस मामले का फैसला इस साल के अंत तक आने की संभावना है।

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