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भारतीय-अमेरिकी बैंकर व परोपकारी विक्टर मेनेजेस का निधन, समाज में बदलाव ही मिशन था

विक्टर मेनेजेस सिटीग्रुप में 32 साल तक सेवाएं देने के बाद सीनियर वाइस प्रेसिडेंट पद से रिटायर हुए थे। 

विक्टर ने MIT के स्लोन स्कूल ऑफ मैनेजमेंट से फाइनेंस में एमबीए किया था। / Image - MIT School of Science

मशहूर भारतीय-अमेरिकी बैंकर, परोपकारी और अमेरिकी-भारत फाउंडेशन (AIF) के सह-संस्थापक विक्टर मेनेजेस का 3 फरवरी को निधन हो गया। वह 77 वर्ष के थे। उन्होंने फ्लोरिडा में अंतिम सांस ली। 

पुणे में जन्मे विक्टर मेनेजेस ने आईआईटी बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन करने के बाद मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के स्लोन स्कूल ऑफ मैनेजमेंट से फाइनेंस में एमबीए किया था। वह सिटीग्रुप में 32 साल तक सेवाएं देने के बाद सीनियर वाइस प्रेसिडेंट पद से रिटायर हुए थे। 

2001 में भारत के भुज में भीषण भूकंप के बाद मेनेजेस ने AIF की स्थापना की थी। यह भारत में महिलाओं, बच्चों और युवाओं को स्वास्थ्य, शिक्षा एवं आजीविका के जरिए सशक्त बनाने के लिए समर्पित संगठन है। फाउंडेशन का दावा है कि उसने 1.9 करोड़ से अधिक लोगों पर सकारात्मक प्रभाव डाला है।

AIF ने एक बयान में विक्टर मेनेजेस के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि हमने एक नेता, मार्गदर्शक, मित्र और AIF का सच्चे समर्थक खो दिया है। हम उन्हें सलाम करते हैं। लोगों की सेवा और सामाजिक परिवर्तन के प्रति उनका अटूट समर्पण आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित और मार्गदर्शन करता रहेगा।

विक्टर मेनेजेस ने MIT कॉरपोरेशन, कैथोलिक चैरिटीज, आइजनहावर फैलोशिप्स और एजुकेशनल टेस्टिंग सर्विस (ETS) के बोर्ड में भी सेवाएं दी हैं। उन्होंने आईआईटी बॉम्बे और INSEAD में सलाहकार की भूमिका निभाई। 2011 में उन्होंने आईआईटी बॉम्बे में एक कन्वेंशन सेंटर की स्थापना के लिए 30 लाख अमेरिकी डॉलर का दान दिया था।

AIF की सह-संस्थापक और वैश्विक बोर्ड की सह-अध्यक्ष लता कृष्णन और सीईओ निशांत पांडे ने एक बयान में कहा कि विक्टर ने सुनिश्चित किया कि हम एक ऐसे संगठन की भावना को बनाए रखें जो मानवीय गरिमा को हमेशा याद रखती है। वह विचार स्पष्ट था कि हम जो कुछ भी कर रहे हैं, वह महज दान नहीं है, बल्कि समाज में अंतर लाने का एक अवसर है। 

विक्टर मेनेजेस अपने पीछे पत्नी तारा और चार बच्चों को छोड़ गए हैं। उनकी पत्नी तारा बेंगलुरु की पूर्व मिस इंडिया रह चुकी हैं और 1973 में मिस एशिया-पैसिफिक का खिताब जीतने वाली दूसरी भारतीय थीं। 


 

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