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भारत-US व्यापार समझौता जल्द, अंतिम दौर में बातचीत

अमेरिका के वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटकनिक ने सोमवार को संकेत दिए कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता जल्द ही हो सकता है।

 अमेरिका के वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटकनिक अमेरिका के वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटकनिक / Reuters

भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ताएं अब निर्णायक मोड़ पर हैं। अमेरिका के वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटकनिक ने सोमवार को संकेत दिए कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता जल्द ही हो सकता है, क्योंकि बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है।

वॉशिंगटन में आयोजित US-India Strategic Partnership Forum के सालाना शिखर सम्मेलन में लटकनिक ने कहा, "आपको निकट भविष्य में भारत और अमेरिका के बीच एक समझौते की उम्मीद करनी चाहिए, क्योंकि हमें एक ऐसा बिंदु मिल गया है जो दोनों देशों के लिए फायदेमंद है।" उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी एक वीडियो पोस्ट कर कहा, “भारत और अमेरिका के बीच संबंध शानदार हैं। मुझे उम्मीद है कि जल्द ही ऐसा व्यापार समझौता होगा जो दोनों देशों के लिए लाभकारी होगा।”

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ट्रम्प प्रशासन ने तय की डेडलाइन
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की अगुवाई में प्रशासन ने 9 जुलाई तक कई व्यापार समझौते अंतिम रूप देने का लक्ष्य रखा है। इसके तहत सभी साझेदार देशों से उनके "सर्वश्रेष्ठ प्रस्ताव" बुधवार तक मांगे गए हैं।

भारत का रुख
भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने समयसीमा पर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन भारत की ओर से अमेरिका के साथ बातचीत कर रहे मुख्य वार्ताकार राजेश अग्रवाल ने कहा है कि चर्चा "सकारात्मक ढंग से आगे बढ़ रही है" और जल्द एक "अच्छा परिणाम" सामने आ सकता है।

अगले कदम क्या हैं?
5-6 जून को एक अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधिमंडल भारत आएगा।
भारतीय टीम अप्रैल में वॉशिंगटन गई थी और केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी हाल ही में अमेरिका दौरा किया था।

अमेरिका की मांगें
लटकनिक ने बताया कि अमेरिका भारत से कृषि उत्पादों पर कम टैरिफ, अमेरिकी कंपनियों को बाजार में बेहतर पहुंच, और रक्षा उपकरणों की अधिक खरीद चाहता है, ताकि व्यापार घाटा कम किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका भारतीय निर्यात को भी अधिक पहुंच देने को तैयार है। लेकिन भारत पर "बहुत अधिक संरक्षणवाद" का आरोप लगाते हुए कहा, "भारत कुछ उत्पादों पर 100% तक टैरिफ लगाता है। हम चाहते हैं कि हमारी कंपनियों को वाजिब बाजार पहुंच मिले।"

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