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विकास में गिरावट के बावजूद भारत के केंद्रीय बैंक ने दरें बरकरार रखीं, गवर्नर ने बताई वजह

RBI के गवर्नर शातिकांत दास ने कहा कि बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने 'विकास की गति में हालिया मंदी' पर ध्यान दिया है लेकिन भारत के दृष्टिकोण को 'लचीला' माना है।

 भारत के केंद्रीय बैंक, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर शक्तिकांत दास भारत के केंद्रीय बैंक, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर शक्तिकांत दास / X@Shaktikanta Das

भारत के केंद्रीय बैंक ने दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में विकास में मंदी की चिंताओं से अधिक मुद्रास्फीति के जोखिम को देखते हुए शुक्रवार को ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कहा कि बेंचमार्क रेपो दर (जिस स्तर पर वह वाणिज्यिक बैंकों को ऋण देता है) 6.50 प्रतिशत पर रहेगी, जहां यह फरवरी 2023 से है।

दुनिया भर के प्रमुख केंद्रीय बैंकों ने कम मुद्रास्फीति के जवाब में वैश्विक सहजता चक्र शुरू कर दिया है जिसमें अमेरिकी फेडरल रिजर्व भी शामिल है। इसने सितंबर में चार साल में पहली बार दरों में कटौती की थी।

खुदरा मुद्रास्फीति लगातार मौद्रिक नीति निर्माताओं के (मुताबिक) चार प्रतिशत लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है। यह अक्टूबर में 14 महीने के उच्चतम स्तर 6.21 प्रतिशत पर पहुंच गई है।
RBI के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने 'विकास की गति में हालिया मंदी' पर ध्यान दिया है लेकिन भारत के दृष्टिकोण को 'लचीला' माना है। दास ने कहा कि प्रतिकूल मौसम की घटनाओं में वृद्धि, भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं में वृद्धि और वित्तीय बाजार में अस्थिरता मुद्रास्फीति के लिए जोखिम पैदा करती है।

RBI ने उधारदाताओं के लिए केंद्रीय बैंक में जमा करने के लिए अपने न्यूनतम नकद आरक्षित अनुपात को 4.5 से घटाकर चार प्रतिशत कर दिया है। कम नकद आरक्षित अनुपात एक तरलता-बढ़ाने वाला उपाय है क्योंकि यह बैंकों को उधार देने के लिए अधिक पैसा देता है।

आर्थिक वृद्धि में मंदी के संकेतों के बावजूद ब्याज दरों को स्थिर रखने का केंद्रीय बैंक का निर्णय आया है। विनिर्माण क्षेत्र में सुस्ती और शहरी खपत में कमी के कारण सितंबर तिमाही में भारत की सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 5.4 प्रतिशत रही।

हालांकि आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि इन हालात के बाद भी भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की स्थिति रखता है लेकिन यह सात तिमाहियों में विकास की सबसे धीमी गति थी और विश्लेषकों की अपेक्षा 6.5 प्रतिशत से कम थी।

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