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मालदीव से जुड़े सवाल पर जयशंकर ने इसलिए कहा, 'मैं गारंटी नहीं दे सकता'

नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जयशंकर ने कहा कि राजनीति तो राजनीति है। मैं इस बात की गारंटी नहीं दे सकता कि हर देश, हर रोज और सभी हमारा समर्थन करेंगे या हमारी बात से सहमत होंगे। विदेश मंत्री ने अन्य देशों में बुनियादी ढांचे के विकास में भारत की भागीदारी का उल्लेख किया।

 नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जयशंकर ने मालदीव से जुड़े सवालों के जवाब दिए। नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जयशंकर ने मालदीव से जुड़े सवालों के जवाब दिए। / @DrSJaishankar

भारत और मालदीव के बीच तनाव जारी है। इस बीच भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मालदीव के साथ चल रहे राजनयिक विवाद पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि इसकी गारंटी नहीं दी जा सकती है कि हर देश हर समय भारत का समर्थन करेगा या सहमत होगा।

नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जयशंकर ने कहा कि राजनीति तो राजनीति है। मैं इस बात की गारंटी नहीं दे सकता कि हर देश, हर रोज और सभी हमारा समर्थन करेंगे या हमारी बात से सहमत होंगे। जयशंकर ने राजनीतिक संबंधों में उतार-चढ़ाव के बावजूद लोगों के बीच सकारात्मक भावनाओं को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करते हुए वैश्विक स्तर पर मजबूत संबंध बनाने के लिए पिछले एक दशक में भारत के प्रयासों को रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि हम बीते 10 सालों से बहुत ही मजबूत रिश्ता बनाने की कोशिश कर रहे हैं और इसमें हमें बहुत सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि राजनीति उतार-चढ़ाव वाली हो सकती है लेकिन उस देश के लोगों की भारत के प्रति अच्छी भावनाएं हैं और वे अच्छे संबंध रखने के महत्व को समझते हैं। इस दौरान विदेश मंत्री ने अन्य देशों में बुनियादी ढांचे के विकास में भारत की भागीदारी का उल्लेख किया।

जयशंकर ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि ये सब इस बात का हिस्सा है कि आप उन रिश्तों को कैसे विकसित करते हैं। हम आज सड़क, बिजली, ट्रांसमिशन, ईंधन की सप्लाई, व्यापार पहुंच प्रदान करने, निवेश करने और उन देशों में शामिल हैं जहां के लोग अन्य देशों में छुट्टियां बिताने जाते हैं। उन्होंने कहा कि कभी-कभी, चीजें अच्छी तरह से नहीं चलती हैं, फिर आपको चीजों को वापस पटरी पर लाने के लिए काम करना पड़ता है।

भारत और मालदीव के बीच राजनयिक विवाद उस समय पैदा हुआ जब मालदीव के तीन नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करते हुए उनकी लक्षद्वीप यात्रा की आलोचना की। भारत ने इस टिप्पणी की कड़ी निंदा की और विरोध दर्ज कराने के लिए मालदीव के राजदूत को तलब किया।

इस घटना के बाद लोगों ने मालदीव के पर्यटन स्थल का बहिष्कार करने के लिए एक ऑनलाइन अभियान शुरू कर दिया। इसके साथ ही भारतीय फिल्म उद्योग की प्रमुख हस्तियों और मशहूर हस्तियों ने लक्षद्वीप और अन्य घरेलू स्थलों में समुद्र तट पर्यटन को बढ़ावा देने के आह्वान का समर्थन किया। मामले की गहराई को समझते हुए मालदीव सरकार ने पीएम मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी से खुद को अलग कर लिया और तीनों मंत्रियों को निलंबित कर दिया।

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