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निर्मला सीतारमण का मिशन अमेरिका: व्यापार वार्ता को मिलेगी नई रफ्तार

भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पांच दिवसीय अमेरिकी दौरे पर हैं, उन्होंने शरद ऋतु तक भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता की उम्मीद जताई है।

निर्मला सीतारमण /

भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उम्मीद जताई है कि अमेरिका के साथ चल रहे व्यापार समझौते का पहला चरण इस साल शरद ऋतु तक "सकारात्मक रूप से" पूरा किया जा सकता है। उन्होंने यह बात सैन फ्रांसिस्को में भारतीय प्रवासी समुदाय को संबोधित करते हुए कही। सीतारमण ने कहा, "अमेरिका के साथ जुड़ाव सिर्फ शुल्क या टैरिफ से संबंधित नहीं है, बल्कि यह हमारे सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार के साथ एक व्यापक समझौते की आवश्यकता का हिस्सा है।"

व्यापारिक संबंधों में नया मोड़
वित्त मंत्री पांच दिवसीय अमेरिकी दौरे पर हैं, जिसमें वह अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक की वसंतकालीन बैठकें तथा G20 वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गवर्नरों की बैठक में भाग लेंगी। वह अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट से मुलाकात करेंगी और यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव ऑफिस के अधिकारियों से भी बातचीत की संभावना है। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार और रणनीतिक सहयोग को लेकर कई उच्च स्तरीय कार्यक्रम चल रहे हैं।

90 दिनों की मोहलत में समझौते की कोशिश
9 अप्रैल को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रमुख व्यापारिक साझेदारों को टैरिफ बढ़ोतरी से 90 दिन की राहत दिए जाने के बाद भारत इस मौके का लाभ उठाकर जल्द समझौता करना चाहता है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत के मुख्य वार्ताकार राजेश अग्रवाल भी 23 अप्रैल से तीन दिवसीय अमेरिका दौरे पर जा रहे हैं, ताकि व्यापार वार्ता को गति दी जा सके।

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उपराष्ट्रपति वेंस और पीएम मोदी की मुलाकात
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी इस सप्ताह भारत दौरे पर हैं। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। दोनों नेता फरवरी में वॉशिंगटन में ट्रंप-मोदी मुलाकात के दौरान तय किए गए द्विपक्षीय एजेंडे की प्रगति की समीक्षा करेंगे।

व्यापार आंकड़े: भारत के पक्ष में भारी सरप्लस
2024 में भारत और अमेरिका के बीच $129 बिलियन डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ, जिसमें भारत को $45.7 बिलियन का व्यापार अधिशेष मिला। अमेरिका से भारत का आयात $41.8 बिलियन का था, जिस पर भारत अब व्यापार समझौते के तहत आधा से ज्यादा आयात पर शुल्क कम करने को तैयार है।
 

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