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गुगेनहाइम फेलोशिप में चार भारतवंशी भी शामिल, इनके बारे में जानिए

1925 में स्थापित फाउंडेशन अब तक 19 हजार से अधिक विद्वानों, कलाकारों और लेखकों को 400 मिलियन डॉलर से अधिक की फेलोशिप दे चुका है।

 गुगेनहाइम फेलोशिप में चार भारतवंशी गुगेनहाइम फेलोशिप में चार भारतवंशी /

प्रतिष्ठित जॉन साइमन गुगेनहाइम मेमोरियल फाउंडेशन ने 2025 के लिए फेलोशिप सूची में चार भारतीय अमेरिकियों को भी शामिल किया है। यह फाउंडेशन की 100वीं सूची है, जिसे करीब 3500 आवेदकों में से चुना गया है। चयनित फेलो 53 विषयों, 83 शिक्षण संस्थानों और अमेरिका के 32 राज्यों तथा कनाडा के दो प्रांतों से आए हैं।

इन चारों भारतीय-अमेरिकियों के बारे में जानते हैं-

लेखिका बिजल त्रिवेदी 
बिजल त्रिवेदी एक पत्रकार हैं, जिनका कार्य विज्ञान से जुड़ी मानवीय कहानियों पर केंद्रित रहा है। वह नेशनल जियोग्राफिक की पूर्व सीनियर साइंस एडिटर रह चुकी हैं। उनकी चर्चित पुस्तक 'ब्रीथ फ्रॉम सॉल्ट' सिस्टिक फायब्रोसिस बीमारी से जुड़े शोध और संघर्ष की कहानी कहती है। फेलोशिप के तहत वह अब सिकल सेल रोग पर काम करेंगी।

यह भी पढ़ें- प्रतिष्ठित प्रो. वार्ष्णेय ने सिरैक्यूज यूनिवर्सिटी में लेगेसी फेलोशिप स्थापित की

कंप्यूटर साइंस जीनियस डॉ. स्वराट चौधरी 
डॉ. स्वराट चौधरी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और फॉर्मल लॉजिक के संगम पर काम करने वाले कंप्यूटर वैज्ञानिक हैं। वह आईआईटी खडगपुर और यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया से शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं। उनकी रिसर्च एआई को अधिक सुरक्षित और समझदार बनाने पर केंद्रित है। उन्हें एनएसएफ करियर अवार्ड और एसीएम सिगप्लान अवार्ड भी मिल चुके हैं।

मानव विज्ञानी तुलसी श्रीनिवास
तुलसी श्रीनिवास एक मानवविज्ञानी हैं, जो धर्म, पारिस्थितिकी और नैतिकता के मेल को अपने शोध का हिस्सा बनाती हैं। वह एमर्सन कॉलेज के मार्लबो इंस्टीट्यूट में प्रोफेसर हैं। उनकी रिसर्च बंगलुरु में पानी की कमी और उससे जुडे धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभवों को दर्शाती है।

खगोल भौतिक विज्ञानी सौरभ झा
सौरभ झा एक खगोल भौतिक विज्ञानी हैं और रटगर्स विश्वविद्यालय में डिस्टिंग्विश्ड प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। उनका शोध टाइप आईए सुपरनोवा पर आधारित है, जो ब्रह्मांड के विस्तार को मापने में सहायक रही है। उनका कार्य तारों के जीवन चक्र और ब्रह्मांड की प्रकृति को समझने में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

गुगेनहाइम फाउंडेशन ने फेलोशिप के साथ अपनी नई ब्रांड पहचान और न्यूयॉर्क हिस्टॉरिकल सोसाइटी के साथ मिलकर एक विशेष प्रदर्शनी की भी घोषणा की है, जिसमें फाउंडेशन के ऐतिहासिक संग्रह की झलक मिलेगी। 1925 में स्थापित फाउंडेशन अब तक 19 हजार से अधिक विद्वानों, कलाकारों और लेखकों को 400 मिलियन डॉलर से अधिक की फेलोशिप दे चुका है।

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