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भारत-चीन के बीच सहयोग बढ़ाने पर फोकस, राजदूत दोरैस्वामी की अहम बैठक

दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक क्षेत्रों में भारत और चीन के बीच सहयोग को मजबूत करने के अवसरों पर चर्चा की।

  भारतीय राजदूत ने क्वानझोउ पार्टी सचिव के साथ द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने के अवसरों पर चर्चा की। भारतीय राजदूत ने क्वानझोउ पार्टी सचिव के साथ द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने के अवसरों पर चर्चा की। / X/@EOIBeijing

भारत के चीन में राजदूत विक्रम दोरैस्वामी ने गुरुवार को क्वानझोउ के पार्टी सचिव झांग यि‍गोंग से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक क्षेत्रों में भारत और चीन के बीच सहयोग को मजबूत करने के अवसरों पर चर्चा की।

बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "राजदूत विक्रम दोरैस्वामी की क्वानझोउ के पार्टी सचिव झांग यि‍गोंग के साथ सौहार्दपूर्ण मुलाकात हुई। दोनों ने व्यापार, निवेश और संस्कृति के क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर बात की। दोनों पक्षों ने भारत और क्वानझोउ के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक संबंधों का ज‍िक्र किया और इन साझा रिश्तों के आधार पर भविष्य में सहयोग को और गहरा करने की इच्छा जताई।"

राजदूत दोरैस्वामी और महावाणिज्य दूत गिंस मैटम ने फुजियान प्रांत के क्वानझोउ में स्थित 7वीं सदी के प्रसिद्ध काइयुआन मंदिर का भी दौरा किया।

दूतावास ने बताया, "राजदूत दोरैस्वामी और महावाणिज्य दूत गिंस मैटम का काइयुआन मंदिर में मुख्य मोंक वेन शी दे शेंग ने गर्मजोशी से स्वागत किया। यह मंदिर भारत और चीन के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंधों का एक बेहतरीन उदाहरण है। इसकी कला और वास्तुकला में स्थानीय और प्राचीन भारतीय परंपराओं की झलक साफ दिखाई देती है।"

बुधवार को राजदूत दोरैस्वामी ने चाइनीज पीपल्स इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन अफेयर्स (सीपीआईएफए) के अध्यक्ष वू केन से भी मुलाकात की।

दूतावास ने 'एक्स' पर लिखा, "राजदूत विक्रम दोरैस्वामी ने सीपीआईएफए के अध्यक्ष राजदूत वू केन से मुलाकात की। उन्होंने लोगों के बीच आपसी संपर्क बढ़ाने में सीपीआईएफए की भूमिका की सराहना की, खासकर ट्रैक-2 और ट्रैक-1.5 संवादों के माध्यम से किए जा रहे प्रयासों की।"

इससे पहले सप्ताह में राजदूत दोरैस्वामी ने चीन के विदेश मंत्रालय की उपमंत्री हुआ चुनयिंग से अपनी पहली औपचारिक मुलाकात की। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि दोनों देशों के नेताओं की उस सोच को आगे बढ़ाया जाए, जिसका उद्देश्य भारत और चीन के बीच स्थिर, सकारात्मक और दोनों देशों के लिए लाभदायक संबंध बनाना है।

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