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ड्यूक ने AI प्रोग्राम के लिए भारतीय मूल के वैज्ञानिकों का चयन किया

भारतीय मूल के शोधकर्ता ड्यूक के नेतृत्व वाली उन अलग-अलग टीमों में शामिल हुए हैं जिन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रिसर्च प्रोजेक्ट्स के लिए फेडरल फंडिंग मिली है।

 तानिया रॉय और गौरव आर्या।   तानिया रॉय और गौरव आर्या। / Duke University

ड्यूक यूनिवर्सिटी को U.S. डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी के 'जेनेसिस मिशन' के तहत चार रिसर्च टीमों का नेतृत्व करने के लिए चुना गया है। इनमें भारतीय मूल के रिसर्चर तानिया रॉय और गौरव आर्य से जुड़े दो प्रोजेक्ट भी शामिल हैं। यह पहल रोबोटिक्स, मटीरियल साइंस, फिजिक्स और एस्ट्रोनॉमी जैसे क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित रिसर्च को सपोर्ट करेगी। इसके पहले चरण में नौ महीनों के लिए $500,000 से $750,000 तक की फंडिंग दी जाएगी।

ड्यूक के प्रैट स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग की रॉय, AI-पावर्ड रोबोट के लिए नया हार्डवेयर बनाने के मकसद से 'यिरन चेन' के नेतृत्व वाले एक प्रोजेक्ट पर काम कर रही हैं। टीम का लक्ष्य ऐसे न्यूरोमोर्फिक प्रोसेसर बनाना है जो इंसानी दिमाग और नर्वस सिस्टम की बनावट की नकल कर सकें, ताकि रोबोटिक सिस्टम को तेज और ज्यादा एनर्जी-एफिशिएंट बनाया जा सके।

ड्यूक के अनुसार, इस हार्डवेयर को मौजूदा डिजाइनों की तुलना में 10 गुना तेज और 100 गुना ज्यादा एफिशिएंट बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। रिसर्चर का कहना है कि कैमरे और दूसरे सेंसर से मिलने वाली जानकारी को प्रोसेस करने में होने वाली देरी, AI-पावर्ड रोबोट के इस्तेमाल को खास कामों से आगे बढ़ाने में एक बड़ी रुकावट बनी हुई है। इस प्रोजेक्ट में जॉर्जिया टेक और ब्रुकहेवन नेशनल लेबोरेटरी के रिसर्चर भी शामिल हैं।

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चेन ने कहा कि तैयार होने वाला सिस्टम स्टील से बने सेंटॉर (centaur) जैसा होगा – एक ऐसा सिंथेटिक जीव जिसके बुनियादी न्यूरोमोर्फिक कंप्यूटिंग कंपोनेंट और क्षमताएं ही उसकी मांसपेशियां, कंकाल और नर्वस सिस्टम बनाती हैं।

ड्यूक के प्रैट स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग से ही जुड़े आर्या, एक अलग प्रोजेक्ट को लीड कर रहे हैं। यह प्रोजेक्ट AI का इस्तेमाल करके DNA ओरिगामी को बेहतर बनाने पर केंद्रित है। DNA ओरिगामी एक ऐसी तकनीक है जिससे एनर्जी से जुड़े कामों के लिए नैनोस्केल स्ट्रक्चर वाले मटीरियल डिज़ाइन किए जाते हैं।

रिसर्च टीम AI-आधारित मॉडल विकसित करेगी ताकि DNA को सटीक स्ट्रक्चर में मोड़ने से जुड़ी कंप्यूटेशनल चुनौतियों को आसान बनाया जा सके। इस काम में ड्यूक के 'स्टीफन जॉशर' के साथ-साथ जॉर्जिया टेक, एमोरी यूनिवर्सिटी और लॉरेंस बर्कले नेशनल लेबोरेटरी के रिसर्चर भी शामिल हैं।

आर्या ने कहा कि हम अभी इस विशाल डिजाइन स्पेस का इस्तेमाल करना शुरू ही कर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि इस कोशिश से बनने वाले नए बायोमटीरियल का एनर्जी प्रोडक्शन, केमिकल मैन्युफैक्चरिंग और यहां तक ​​कि क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे उद्योगों पर बहुत बड़ा असर पड़ेगा।

जेनेसिस मिशन, डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी की एक पहल है। इसका मकसद एक ऐसे प्लेटफॉर्म के जरिए वैज्ञानिक खोज को आगे बढ़ाना है जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सुपरकंप्यूटिंग, क्वांटम सिस्टम और एडवांस्ड वैज्ञानिक उपकरणों को एक साथ लाता है। यह सरकारी, औद्योगिक, शैक्षणिक और परोपकारी संगठनों के रिसर्चर को एक साथ लाता है।

रॉय और आर्या से जुड़े इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स के अलावा, ड्यूक 'ट्रिनिटी कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड साइंसेज' के दो प्रोजेक्ट्स को भी लीड करेगा। एक प्रोजेक्ट को 'स्टेफन ए. बास' लीड करेंगे। इसमें AI का इस्तेमाल करके एटॉमिक न्यूक्लिआई (परमाणु नाभिक) के मॉडल को बेहतर बनाया जाएगा। इसके लिए एक्सपेरिमेंटल डेटा को हेवी-आयन टक्करों के सिमुलेशन से जोड़ा जाएगा। दूसरे प्रोजेक्ट को 'केट शोलबर्ग' लीड करेंगी। इसमें न्यूट्रिनो डेटा का तेजी से विश्लेषण करने के लिए AI तरीके विकसित किए जाएंगे। इससे खगोलविदों को सुपरनोवा जैसे तारों के विस्फोटों पर तेजी से प्रतिक्रिया करने में मदद मिलेगी।

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