दिलजीत दोसांझ / DILJIT DOSANJH/instagram
पंजाबी म्यूजिक और फिल्म इंडस्ट्री के चमकते सितारे दिलजीत दोसांझ आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। बचपन से ही उनकी आवाज में एक जादू था, जो लोगों के दिलों को छू लेता था। बहुत कम लोग जानते हैं कि उन्होंने अपनी गायिकी की शुरुआत गुरुद्वारों में कीर्तन से की थी। उनके इस अनुभव की झलक आज भी संगीत और स्टेज पर परफॉर्मेंस में दिखती है।
आज दिलजीत का नाम न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में मशहूर है। उनके फैंस उनकी आवाज और अभिनय दोनों के दीवाने हैं।
दिलजीत दोसांझ का जन्म 6 जनवरी 1984 को पंजाब के जालंधर जिले के छोटे से गांव दोसांझ कलां में हुआ था। उनका परिवार बहुत साधारण था और शुरुआती दिनों में उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। यही वजह थी कि वह अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए लुधियाना चले गए और वहीं अपने रिश्तेदार के घर रहने लगे।
दिलजीत ने स्कूली पढ़ाई यहीं पूरी की। पढ़ाई से ज्यादा उनका मन संगीत में लगता था। वह अक्सर गुरुद्वारों के कीर्तन में गाया करते थे। लोगों की सराहना ने उन्हें यह महसूस करवाया कि उनकी आवाज में जादू है।
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गुरुद्वारे में गाने की शुरुआत ने ही उनके करियर का आधार रखा। धीरे-धीरे वह शादियों और छोटे कार्यक्रमों में गाने लगे। उनकी मेहनत और लगन ने उन्हें जल्द ही पहचान दिलाई। 2003 में उन्होंने अपना पहला एल्बम 'इश्क दा उड़ा अड़ा' रिलीज किया, जिसने उन्हें पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री में एक नई पहचान दिलाई। इसके बाद उनका दूसरा एल्बम 'स्माइल' आया और फिर 2009 में 'द नेक्स्ट लेवल' रिलीज हुआ। इन एल्बम्स में उनके गाने हिट रहे। इसके अलावा, उन्होंने 'पटियाला पैग', 'लवर', और 'प्रॉपर पटोला' जैसे कई हिट सॉन्ग्स दिए।
गुरुद्वारे से मिली संगीत की सीख उनके गानों में हमेशा झलकती रही। उनकी गायिकी में वह भावपूर्ण शैली है, जो दर्शकों को जोड़ती है। यही कारण है कि उनके लाइव कॉन्सर्ट्स में टिकट आसानी से नहीं मिलती और अगर मिलती भी है तो कीमतें बहुत ऊंची होती हैं। उनका फैन-फॉलोइंग उत्तरी अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों तक फैली हुई है।
एक एक्टर के रूप में भी दिलजीत ने अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने 2011 में पंजाबी फिल्म 'द लायन ऑफ पंजाब' से अभिनय की शुरुआत की। इसके बाद उनकी हिट फिल्में आईं, जैसे 'जट्ट एंड जूलिएट', 'सुपर सिंघ', और 'अंबरसरिया'। बॉलीवुड में उनकी शुरुआत 2016 में क्राइम थ्रिलर 'उड़ता पंजाब' से हुई, जिसके लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला और सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के लिए नामांकन भी मिला।
इसके बाद उन्होंने 'गुड न्यूज' और 'अमर सिंह चमकीला' जैसी फिल्में कीं, जो दर्शकों और आलोचकों दोनों की पसंदीदा रहीं। दिलजीत दोसांझ ने समाज सेवा से भी नाम कमाया। 2013 में उन्होंने सांझ फाउंडेशन शुरू किया, जो बच्चों और बुजुर्गों की मदद करता है और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करता है।
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