विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल / Courtesy: IANS/Prem Nath Pandey
कनाडाई खुफिया एजेंसी कनेडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस (सीएसआईएस) ने भारत पर उसके देश में हस्तक्षेप का आरोप लगाया है। भारत ने आरोपों को "बेबुनियाद" करार देते हुए सिरे से खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत अन्य देशों की संप्रभुता का सम्मान करता है और किसी भी देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप उसकी नीति नहीं है।
नई दिल्ली में साप्ताहिक प्रेस वार्ता में, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने यह भी कहा कि ऐसी किसी भी समस्या पर राजनीतिक या सार्वजनिक चर्चा से बचना चाहिए और इसे तय प्रक्रिया के तहत सुलझाया जाना चाहिए।
जायसवाल ने कहा, "इस खास मुद्दे पर भारत की स्थिति स्पष्ट और एक जैसी रही है, और हमने पहले भी कई मौकों पर इस बारे में बात की है। हम ऐसे बेबुनियाद आरोपों को पूरी तरह से खारिज करते हैं। भारत एक लोकतांत्रिक देश है जो अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करता है और दूसरे देशों की संप्रभुता का सम्मान करता है। दूसरे देशों के मामलों में दखल देना हमारी नीति नहीं है। हमारा मानना है कि ऐसे मसलों की राजनीतिक या सार्वजनिक मंचों पर चर्चा के बजाए तय प्रक्रिया के तहत सुलझाया जाना चाहिए।"
अपनी नवीनतम 'पब्लिक रिपोर्ट 2025' में, सीएसआईएस ने कहा कि कनाडा की राजनीति में विदेशी दखलंदाजी बहुत ज्यादा और आक्रामक है। रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य अपराधी—चीन, रूस, ईरान और पाकिस्तान—संस्थाओं को कमजोर करने, लोगों की मनस्थिति को प्रभावित करने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भरोसा खत्म करने के लिए अलग-अलग पैंतरे का इस्तेमाल करते हैं।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि कनाडा-बेस्ड खालिस्तानी एक्सट्रीमिस्ट्स (सीबीकेई) की हिंसक चरमपंथी गतिविधियों में लगातार शामिल होना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बना हुआ है।
विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को भारत के पुराने रुख को फिर स्पष्ट किया। कहा कि भारत ने चरमपंथियों और अलगाववादियों द्वारा कनाडाई इलाके को पनाहगाह के तौर पर इस्तेमाल करने की जानकारी समय-समय पर दी है।
जायसवाल ने कहा, "सीएसआईएस का आकलन खुद ही कनाडा में खालिस्तान अलगाववादी आंदोलन के समर्थकों की मौजूदगी को स्वीकारता है, बल्कि मानता भी है कि कनाडा-स्थित खालिस्तानी चरमपंथी गुट न केवल भारत के लिए बल्कि कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं। इस रिपोर्ट में यह भी है कि ऐसे तत्व लोकतांत्रिक आजादी और संस्थाओं का गलत इस्तेमाल करके उग्रवाद को बढ़ावा देते हैं और ऐसे फंड इकट्ठा करते हैं जिनका इस्तेमाल हिंसक गतिविधियों के लिए किया जाता है।"
उन्होंने आगे कहा, "भारत ने बार-बार कनाडाई अधिकारियों से अपनी जमीन से काम कर रहे भारत विरोधी तत्वों के खिलाफ असरदार कार्रवाई करने की अपील की है। इसमें हिंसा का महिमामंडन, राजनयिकों और नेताओं को धमकियां देना, पूजा स्थलों में तोड़-फोड़ करना और तथाकथित जनमत संग्रहों के जरिए अलगाववाद को बढ़ावा देने की कोशिशें जैसे मुद्दे शामिल हैं।"
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