अमेरिकी सांसद रिच मैककॉर्मिक और अमी बेरा रिचर्ड एम. रॉसो के साथ चर्चा में। / Shinjini Ghosh
अमेरिकी सांसदों रिच मैककॉर्मिक और अमी बेरा ने साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और बढ़ते रणनीतिक तालमेल का हवाला देते हुए अमेरिका-भारत संबंधों को मजबूत करने में द्विदलीय सहयोग के महत्व पर जोर दिया।
सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में दोनों सांसदों ने प्रौद्योगिकी, रक्षा सहयोग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, आप्रवासन और भारतीय प्रवासी समुदाय की भूमिका सहित कई मुद्दों पर चर्चा की। इस चर्चा का संचालन सीएसआईएस में भारत और उभरते एशिया के अर्थशास्त्र के अध्यक्ष रिचर्ड एम. रॉसो ने किया।
मैककॉर्मिक ने कहा कि आपके पास सबसे पुराना लोकतंत्र और सबसे बड़ा लोकतंत्र है, अगर वे एकजुट हो जाएं... तो हम सचमुच शांति की एक नई पीढ़ी की शुरुआत कर सकते हैं जो सौ साल तक कायम रह सकती है।" उन्होंने आगे कहा कि ऐसा करने में विफलता 'हमारे लिए विनाशकारी' होगी।
जॉर्जिया से रिपब्लिकन सांसद और भारत और भारतीय अमेरिकियों पर कांग्रेस कॉकस के सह-अध्यक्ष मैककॉर्मिक ने भारत के साथ सहयोग गहराने, विशेष रूप से उभरती प्रौद्योगिकियों में, अमेरिका के लिए अपने उत्पादों की खुली पहुंच बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि अगर आप गौर करें तो भारतीय बाजार या तो हम पर निर्भर करेगा या चीन पर। अगर हम अपने उत्पादों की उपलब्धता सीमित करना शुरू कर दें, तो यह हमारे देश के लिए नुकसानदायक होगा। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका बाजार खुला रहे, निष्पक्ष बना रहे, और हम ऐसे पारस्परिक टैरिफ न लगाएं जिससे कीमतें बढ़ें और हमारे उत्पाद महंगे हो जाएं।
कैलिफोर्निया से डेमोक्रेट और कांग्रेस के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले भारतीय अमेरिकी सदस्य बेरा ने रूस-यूक्रेन संघर्ष के समाधान सहित वैश्विक कूटनीति में भारत की संभावित भूमिका पर प्रकाश डाला।
बेरा ने कहा कि यह भारत के लिए अपनी वैश्विक कूटनीतिक क्षमताओं को परखने का अवसर है,” और सुझाव दिया कि इस तरह की भागीदारी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ संबंध बनाने में भी मदद कर सकती है।
बेरा ने अमेरिकी आव्रजन नीति पर पुनर्विचार करने का भी आह्वान किया, विशेष रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे उच्च मांग वाले क्षेत्रों में, और मौजूदा एच-1बी प्रणाली को त्रुटिपूर्ण बताया।
बेरा ने पूछा कि क्या हम उन समस्याओं के इर्द-गिर्द गलियारे बना सकते हैं जिन्हें हम हल करना चाहते हैं? एआई उनमें से एक हो सकता है जहां कामगारों का आना-जाना लगा रहता है। मुझे लगता है कि यह एक ऐसा क्षेत्र है जिस पर हम द्विदलीय सहयोग से काम कर सकते हैं, विशिष्ट आवश्यकताओं पर पुनर्विचार कर सकते हैं और वीजा की नई श्रेणियां बना सकते हैं।
मैककॉर्मिक ने भी सहमति जताते हुए कहा कि आव्रजन और कार्यबल नीतियों को बदलती आर्थिक परिस्थितियों के साथ विकसित होना चाहिए। उन्होंने कहाकि हमें हर साल अनुकूलन और समायोजन करने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन के साथ हालिया बातचीत का जिक्र करते हुए मैककॉर्मिक ने कहा कि उन्होंने शुरू में इसे चिंता की नजर से देखा था।
उन्होंने कहा कि मुझे चिंता थी कि हम विश्व राजनीति में एक ऐसा बदलाव देख रहे हैं जो वास्तव में चिंताजनक होगा। साझेदारों को बुरे तत्वों से दूर रखने के लिए कभी-कभी व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक होता है।
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