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कील इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट: ट्रम्प के टैरिफ को भुगत रहे हैं अमेरिकी लोग

कील इंस्टीट्यूट के अनुसंधान निदेशक जूलियन हिंज ने इन टैरिफ को 'खुद का नुकसान' बताया है।

इस रिपोर्ट में भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ के परिणामों का अध्ययन किया गया है। / REUTERS/Dado Ruvic/Illustration

कील इंस्टीट्यूट फॉर द वर्ल्ड इकोनॉमी की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प की टैरिफ नीति का 96 प्रतिशत बोझ अमेरिकी उपभोक्ताओं और आयातकों पर पड़ रहा है। इस रिपोर्ट में भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ के परिणामों का अध्ययन किया गया है।

ट्रम्प प्रशासन ने उन देशों पर भारी टैरिफ प्रतिबंध लगाए हैं जो उसके भू-राजनीतिक विचारों और महत्वाकांक्षाओं के अनुरूप नहीं हैं। इसका घोषित उद्देश्य दूसरे देश की अर्थव्यवस्था को कमजोर करना और साथ ही अमेरिकी विनिर्माण को बढ़ावा देना है।

हालांकि, नए अध्ययन में दावा किया गया है कि ट्रम्प के टैरिफ का खामियाजा अमेरिकियों को भुगतना पड़ रहा है। कील इंस्टीट्यूट के अनुसंधान निदेशक जूलियन हिंज ने इन टैरिफ को 'खुद का नुकसान' बताया है।

हिंज ने आगे कहा कि यह दावा कि विदेशी देश इन शुल्कों का भुगतान करते हैं, एक मिथक है। आंकड़े इसके विपरीत दिखाते हैं: इसका बोझ अमेरिकी उठा रहे हैं। शोध दल ने 4 ट्रिलियन डॉलर से अधिक मूल्य के 25 मिलियन से अधिक शिपमेंट के रिकॉर्ड का विश्लेषण किया और पाया कि विदेशी निर्यातकों ने शुल्क का केवल लगभग चार प्रतिशत ही वहन किया, जबकि 96 प्रतिशत बोझ अमेरिकी खरीदारों पर पड़ा। हालांकि, यह प्रयास अमेरिकी सीमा शुल्क विभाग के लिए बेहद लाभदायक साबित हुआ है, जिससे 2025 में राजस्व में 200 बिलियन डॉलर की वृद्धि हुई है।

हिंज ने बताया कि हमने अमेरिका को भारतीय निर्यात की तुलना यूरोप और कनाडा को किए गए शिपमेंट से की और एक स्पष्ट पैटर्न पाया।

हिंज के अनुसार अमेरिका को निर्यात मूल्य और मात्रा दोनों में 24 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आई है। लेकिन इकाई मूल्य - भारतीय निर्यातकों द्वारा लिए जाने वाले मूल्य - अपरिवर्तित रहे। उन्होंने कम शिपमेंट किया, न कि सस्ता।


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