अमेरिकी ध्वज / pexels
जैसे-जैसे साल 2025 अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच रहा है, अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के भीतर राजनीतिक चर्चाएं अब उतावली कम और आत्ममंथन से भरी ज्यादा नजर आने लगी हैं। नवंबर 2026 के मिडटर्म चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन उनके प्रति उत्सुकता अभी से आकार लेने लगी है। दशकों में भारतीय-अमेरिकियों ने अमेरिकी सार्वजनिक जीवन में धीरे-धीरे अपनी मौजूदगी मजबूत की है- पहले स्थानीय निकायों में, फिर राज्य विधानसभाओं में और अंततः अमेरिकी कांग्रेस तक। अब एक नया दौर शुरू होता दिख रहा है, जहां महत्वाकांक्षाएं कैपिटल हिल से आगे बढ़कर गवर्नर हाउस और राज्य-स्तरीय कार्यकारी नेतृत्व तक पहुंच रही हैं।
वॉशिंगटन में भारतीय-अमेरिकियों ने पहले ही कई अहम पड़ाव पार कर लिए हैं। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में कई भारतीय-मूल के नेता पहुंच चुके हैं और कुछ चुनिंदा सीनेट तक भी पहुंचे हैं। कभी इन्हें राजनीतिक सफलता की पराकाष्ठा माना जाता था, लेकिन अब ये उपलब्धियां मंज़िल नहीं, बल्कि एक मजबूत आधार लगने लगी हैं। गवर्नर पद के लिए आगे आने वाले भारतीय-अमेरिकी नेताओं की बढ़ती संख्या यह दिखाती है कि यह समुदाय अब खुद को अमेरिकी लोकतांत्रिक ढांचे का गहराई से जुड़ा, आत्मविश्वासी और बड़े पैमाने पर बदलाव लाने के लिए तैयार मानता है।
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इनमें सबसे चर्चित नामों में विवेक रामास्वामी शामिल हैं। सिनसिनाटी में जन्मे बायोटेक उद्यमी रामास्वामी 2024 के रिपब्लिकन राष्ट्रपति प्राइमरी के दौरान राष्ट्रीय पहचान बना चुके हैं और अब उन्होंने ओहायो के गवर्नर पद के लिए चुनावी अभियान शुरू कर दिया है। अपने अभियान की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा, “मुझे गर्व है कि मैं उसी राज्य का अगला गवर्नर बनने की दौड़ में हूं, जहां मेरा जन्म हुआ, जहां मैं पला-बढ़ा और जहां मैं अपनी पत्नी के साथ अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहा हूं।” उन्होंने अपनी उम्मीदवारी को विचारधारा से ज्यादा अपनी जड़ों, परिवार और अवसरों की कहानी से जोड़ा।
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