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इंडियन-अमेरिकन ड्रीम की कहानी है चंद्राणी घोष की डेब्यू नॉवेल

चंद्राणी घोष ने इस लॉन्च की झलकियां इंस्टाग्राम पर शेयर करते हुए लिखा कि कोलकाता में शानदार रिस्पॉन्स देखने को मिला। हॉल लोगों से भरा हुआ था। काफी सवाल पूछे गए और बाद में बातचीत के लिए भी रुके।

चंद्राणी घोष / Facebook/@Aritra Sarkar

पत्रकार से लेखिका बनीं चंद्राणी घोष ने अपने पहले उपन्यास ‘Heartlines: A Love Triangle’ के साथ साहित्य की दुनिया में कदम रखा है। यह किताब इंडियन-अमेरिकन अनुभव में पहचान, महत्वाकांक्षा और रिश्तों की जटिलताओं को दिखाती है। यह किताब 3 मार्च को ब्लूम्सबरी द्वारा प्रकाशित हुई। इसके बाद 20 मार्च को कोलकाता के पार्क स्ट्रीट स्थित ऑक्सफोर्ड बुकस्टोर में इसका लॉन्च इवेंट हुआ।

चंद्राणी घोष ने इस लॉन्च की झलकियां इंस्टाग्राम पर शेयर करते हुए लिखा कि कोलकाता में शानदार रिस्पॉन्स देखने को मिला। हॉल लोगों से भरा हुआ था। काफी सवाल पूछे गए और बाद में बातचीत के लिए भी रुके।

यह किताब शर्मिला बसु की कहानी पर आधारित है। वह एक इंडियन-अमेरिकन पॉलिटिकल जर्नलिस्ट है जिसकी जिंदगी बाहर से एक परफेक्ट अमेरिकन ड्रीम जैसी लगती है। उनका करियर सफल रहा है। उनके पास कपड़ों का शानदार कलेक्शन है और वह वॉशिंगटन डीसी में एक लग्जरी घर में रहती हैं। वह अपने बॉयफ्रेंड के साथ रहती हैं जिसका नाम लायनेल स्टर्न है। वह अमेरिका का एक बड़ा टीवी न्यूज एंकर है।

लेकिन इस सब के बावजूद बसु की जिंदगी में एक खालीपन है। वह एक भारतीय विदेश सेवा अधिकारी की बेटी है और बचपन में दुनिया के कई देशों में रही है। इसलिए वह एक स्थिर और तयशुदा जिंदगी की आदी नहीं है। यह उपन्यास वॉशिंगटन डीसी और यूरोप के कई हिस्सों जैसे अंतरराष्ट्रीय बैकग्राउंड पर आधारित है। इसमें प्रोफेशनल सफलता और पर्सनल खुशी के बीच के टकराव को दिखाया गया है।

कहानी एक लव ट्रायंगल के जरिए आगे बढ़ती है जिसमें प्यार, चाहत और खुद को समझने की तलाश दिखाई गई है। इसके जरिए गहरी सांस्कृतिक और भावनात्मक उलझनों को भी सामने लाया गया है। यह कहानी कहीं न कहीं खुद चंद्राणी घोष के अनुभवों से भी जुड़ी है क्योंकि उन्होंने कोलकाता, दिल्ली, लंदन और जेनेवा जैसे शहरों में समय बिताया है।

किताब इंडियन डायस्पोरा की जिंदगी और पावर सर्कल्स के अंदर की दुनिया को करीब से दिखाती है। साथ ही यह भी बताती है कि महत्वाकांक्षा और विदेश में बसने की कीमत व्यक्तिगत जीवन पर कैसे असर डालती है। चंद्राणी घोष इससे पहले टाइम, फॉब्स और बिजनेस स्टेंडर्ड जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में पत्रकार रह चुकी हैं।

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