पद्मा विश्वनाथन / Wikipedia
भारतीय मूल की लेखिका और अनुवादक पद्मा विश्वनाथन को 2026 के इंटरनेशनल बुकर प्राइज की शॉर्टलिस्ट में जगह मिली है। यह दुनिया के सबसे बड़े साहित्यिक पुरस्कारों में से एक माना जाता है। 31 मार्च को जारी सूची के अनुसार उन्हें यह सम्मान पुर्तगाली उपन्यास के अंग्रेजी अनुवाद के लिए मिला है।
इस किताब का नाम ऑन अर्थ एज इट इस बिनिथ यानी “On Earth As It Is Beneath” है जिसे ब्राजील की लेखिका एना पॉला ने लिखा है। यह किताब उन छह चुनिंदा पुस्तकों में शामिल है, जिन्हें इस साल के पुरस्कार के लिए चुना गया है। यह पुरस्कार हर साल किसी एक ऐसी किताब को दिया जाता है जिसे अंग्रेजी में अनुवाद किया गया हो और यूके या आयरलैंड में प्रकाशित किया गया हो।
शॉर्टलिस्ट में शामिल हर किताब को 5,000 पाउंड की राशि दी जाती है। यह राशि लेखक और अनुवादक के बीच बराबर बांटी जाती है। जजों ने इस उपन्यास को ताकत और भ्रष्टाचार पर आधारित एक गहरी कहानी बताया। उन्होंने कहा कि यह एक कठोर और असरदार कहानी है जो ब्राजील की एक दूरदराज जेल में सेट है जहां न्याय और क्रूरता की सीमाएं मिट जाती हैं।
इंटरनेशनल बुकर प्राइज 2026 की जूरी प्रमुख नताशा ब्राउन ने कहा कि इस बार की सूची दुनिया भर की बेहतरीन कहानियों का संग्रह है। उन्होंने कहा कि इन कहानियों में दर्द, संघर्ष और अकेलापन है लेकिन साथ ही उम्मीद और इंसानियत भी दिखती है।
आपको बताएं कि 58 साल की पद्मा विश्वनाथन, यूनिवर्सिटी ऑफ अर्क्नसास-फॉएटेविले यानी University of Arkansas-Fayetteville में क्रिएटिव राइटिंग की प्रोफेसर हैं। वह वहां लेखन और अनुवाद पढ़ाती हैं। वह नाटककार, उपन्यासकार और संस्मरण लेखक भी हैं। उनकी किताबें आठ देशों में प्रकाशित हो चुकी हैं। इस पुरस्कार की कुल राशि 50,000 पाउंड है जो लेखक और अनुवादक के बीच बराबर बांटी जाती है।
पिछले साल यह पुरस्कार कन्नड़ लेखिका बानू मुस्ताख और अनुवादक दीपा भाषटी को मिला था। उन्हें हर्ट लेंप नाम की कहानी संग्रह के लिए सम्मानित किया गया था। इस साल विजेता का ऐलान 19 मई को लंदन के टेट मॉडर्न में आयोजित समारोह में किया जाएगा।
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