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मुंबई में ऋषि सुनक ने खेला क्रिकेट, T-20 मैच देखा, इस अंदाज में मनाया भारत यात्रा का जश्न

पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक के भारत दौरे में राजनीति से इतर खेलों का मजा भी शामिल रहा। मुंबई में उन्होंने टेनिस बॉल क्रिकेट खेला और भारत-इंग्लैंड टी20 मैच भी देखा। इस यात्रा में उनकी विरासत, साहित्य और परिवार का भी खूब साथ रहा।

 जयपुर के साहित्यिक माहौल से मुंबई के क्रिकेट के रंग में रंगे पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक।  जयपुर के साहित्यिक माहौल से मुंबई के क्रिकेट के रंग में रंगे पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक। / X

पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक की भारत यात्रा उनके विरासत, साहित्य और क्रिकेट के जश्न से भरी हुई है। 1 फरवरी को जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में शामिल होने के बाद सुनक मुंबई पहुंचे। यहां उन्होंने पारसी जिमखाना में टेनिस बॉल क्रिकेट खेलकर एक देसी शौक का आनंद लिया। 

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में अपनी पेशी के कुछ ही दिनों बाद सुनक मुंबई पहुंचे। जयपुर में उनकी पत्नी अक्षता मूर्ति ने अपनी मां और जाने-माने लेखक और समाजसेवी सुधा मूर्ति के साथ मंच साझा किया था।

सुनक ने चर्चगेट के क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया (CCI) में नाश्ता करने से पहले एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, मुंबई का दौरा टेनिस बॉल क्रिकेट के बिना अधूरा रहता। वो बाद में 2 फरवरी को वानखेड़े स्टेडियम में भारत-इंग्लैंड टी20 मैच देखने भी गए, जहां उनके साथ उनके ससुर और Infosys के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति भी थे। मैच में इंग्लैंड की हार के बाद सुनक ने इंस्टाग्राम पर एक सेल्फी शेयर करते हुए टीम को हिम्मत दी। उन्होंने लिखा, 'वानखेड़े में इंग्लैंड के लिए मुश्किल दिन रहा, लेकिन मुझे पता है कि हमारी टीम और मजबूत होकर वापसी करेगी। भारतीय टीम को जीत की बधाई।'

पूर्वी अफ्रीका से ब्रिटेन आए भारतीय मूल के माता-पिता के घर जन्मे सुनक 200 साल से ज्यादा समय में ब्रिटेन के सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री बने थे। लेबर पार्टी की जबरदस्त जीत के बाद नवंबर 2024 में उनका कार्यकाल खत्म हो गया, हालांकि वो अभी भी कंजरवेटिव सांसद हैं। 

वानखेड़े स्टेडियम में टी-20 मैच देखने ड्यूक ऑफ एडिनबर्ग प्रिंस एडवर्ड भी पहुंचे थे। अपने दौरे के दौरान ड्यूक ने दोनों टीमों के कप्तानों से मुलाकात की और इंटरनेशनल अवॉर्ड फॉर यंग पीपल (IAYP) के युवा विजेताओं से भी बातचीत की। IAYP, प्रिंस एडवर्ड के दिवंगत पिता प्रिंस फिलिप द्वारा 1956 में शुरू किया गया था। दावा है कि यह संस्था युवाओं में अनौपचारिक शिक्षा और कौशल विकास को बढ़ावा देता है। ड्यूक का तीन दिन का भारत दौरा दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने और पुरस्कार कार्यक्रम के प्रभाव को उजागर करने पर केंद्रित है। 

 

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