ADVERTISEMENT

ADVERTISEMENT

भारतीय मूल के 6 स्कॉलर्स को माइक्रोसॉफ्ट रिसर्च फेलोशिप, मिलेगी फंडिंग

इस समूह में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जीनोमिक्स और मल्टीमॉडल सिस्टम्स के क्षेत्रों में काम करने वाले शोधकर्ता शामिल हैं।

(ऊपर बाएं से दाएं) नम्रता काला, आदित्य वशिष्ठ, रविश्री वल्लूरी/ (नीचे बाएं से दाएं) साइमन दहल, सौजस वडुगुरु, चाणक्य एकबोटे / Microsoft

अमेरिका की जानी-मानी यूनिवर्सिटी के फैकल्टी और पीएचजी स्कॉलर्स समेत भारतीय मूल के छह शोधकर्ताओं को माइक्रोसॉफ्ट रिसर्च फेलोशिप के लिए चुना गया है। कंपनीने 9 अप्रैल को यह घोषणा की। वैश्विक और सामाजिक प्रभाव के लिए AI श्रेणी में मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के स्लोन स्कूल ऑफ मैनेजमेंट की एसोसिएट प्रोफेसर नम्रता काला को AI अपनाने से जुड़े वैश्विक रोजगार और हायरिंग के नतीजों पर उनके प्रोजेक्ट के लिए चुना गया।

काला की रिसर्च पर्यावरण और विकास अर्थशास्त्र पर केंद्रित है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में बैचलर डिग्री और येल से मास्टर डिग्री हासिल की है, और येल से ही पर्यावरण अर्थशास्त्र में पीएचडी की है।

यह भी पढ़ें: New York की पावर लिस्ट में भारतीय अमेरिकियों को मिली पहचान

इसी वर्ग कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर आदित्य वशिष्ठ को वैश्विक बहुसंख्यक भाषाओं, संस्कृतियों और संदर्भों में AI को स्थापित करने के उनके काम के लिए फेलोशिप सलाहकार के तौर पर चुना गया। वशिष्ठ ने भारत में जेपी इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी की पढ़ाई पूरी की, और उसके बाद यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन से कंप्यूटर साइंस में मास्टर और PhD की डिग्रियां हासिल कीं।

AI के मूल सिद्धांत: स्केलेबल तर्क, मॉडल अनुकूलन और मूल्यांकन) कैटेगरी के तहत यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, लॉस एंजिलिस की PhD छात्रा रविस्री वल्लूरी को रिट्रीवल मॉडल्स की पोस्ट-ट्रेनिंग पर रिसर्च के लिए चुना गया। वल्लूरी ने अपनी डॉक्टरेट की पढ़ाई शुरू करने से पहले, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मद्रास से कंप्यूटर साइंस में बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी पूरी की थी। इससे पहले, उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट में बड़े पैमाने पर जेनेरेटिव रिट्रीवल सिस्टम पर काम किया था।

बायोलॉजिकल और साइंटिफिक मॉडलिंग कैटेगरी में वॉशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी के PhD छात्र, सैमन दहल को रेगुलेटरी जीनोमिक्स के लिए जेनेरेटिव मॉडल्स पर उनके काम के लिए चुना गया।वे बायोलॉजिकल सिस्टम्स में मशीन लर्निंग और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग को लागू करने पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि फेलो के तौर पर चुने जाने के लिए वे बेहद आभारी हैं।

Human-AI के बीच सहयोग और बातचीत के क्षेत्र में, कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी के PhD छात्र सौजस वडुगुरु को AI पर एक सहयोगी टीममेट के तौर पर रिसर्च करने के लिए चुना गया। PhD करने से पहले, वडुगुरु ने इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, हैदराबाद से कम्प्यूटेशनल लिंग्विस्टिक्स में मास्टर ऑफ साइंस की पढ़ाई पूरी की थी।

मल्टीमॉडल और एम्बोडीड इंटेलिजेंस कैटेगरी में, मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के PhD छात्र चाणक्य एकबोटे को मल्टीमॉडल लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स के लिए बुनियादी तरीकों पर काम करने के लिए चुना गया। एकबोटे इससे पहले Microsoft और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरु में रिसर्च से जुड़े पदों पर काम कर चुके हैं।

Microsoft ने बताया कि यह फेलोशिप प्रोग्राम अकादमिक विद्वानों और Microsoft के रिसर्चर्स के बीच खुले रिसर्च सहयोग को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसका मकसद उन चुनौतियों पर काम करना है जिनसे वैज्ञानिक समझ, इनोवेशन और समाज को होने वाले फायदों को आगे बढ़ाया जा सके।

कंपनी ने बताया कि चुने गए फेलो Microsoft की रिसर्च टीमों के साथ मिलकर काम करते हैं और इस प्रोग्राम के तहत उन्हें संस्थागत फंडिंग भी मिलती है।

अन्य खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें न्यू इंडिया अब्रॉड
 

 

अमेरिका की जानी-मानी यूनिवर्सिटी के फैकल्टी और पीएचजी स्कॉलर्स समेत भारतीय मूल के छह शोधकर्ताओं को माइक्रोसॉफ्ट रिसर्च फेलोशिप के लिए चुना गया है। कंपनीने 9 अप्रैल को यह घोषणा की। वैश्विक और सामाजिक प्रभाव के लिए AI श्रेणी में मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के स्लोन स्कूल ऑफ मैनेजमेंट की एसोसिएट प्रोफेसर नम्रता काला को AI अपनाने से जुड़े वैश्विक रोजगार और हायरिंग के नतीजों पर उनके प्रोजेक्ट के लिए चुना गया।

काला की रिसर्च पर्यावरण और विकास अर्थशास्त्र पर केंद्रित है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में बैचलर डिग्री और येल से मास्टर डिग्री हासिल की है, और येल से ही पर्यावरण अर्थशास्त्र में पीएचडी की है।

यह भी पढ़ें: New York की पावर लिस्ट में भारतीय अमेरिकियों को मिली पहचान

इसी वर्ग कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर आदित्य वशिष्ठ को वैश्विक बहुसंख्यक भाषाओं, संस्कृतियों और संदर्भों में AI को स्थापित करने के उनके काम के लिए फेलोशिप सलाहकार के तौर पर चुना गया। वशिष्ठ ने भारत में जेपी इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी की पढ़ाई पूरी की, और उसके बाद यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन से कंप्यूटर साइंस में मास्टर और PhD की डिग्रियां हासिल कीं।

AI के मूल सिद्धांत: स्केलेबल तर्क, मॉडल अनुकूलन और मूल्यांकन) कैटेगरी के तहत यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, लॉस एंजिलिस की PhD छात्रा रविस्री वल्लूरी को रिट्रीवल मॉडल्स की पोस्ट-ट्रेनिंग पर रिसर्च के लिए चुना गया। वल्लूरी ने अपनी डॉक्टरेट की पढ़ाई शुरू करने से पहले, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मद्रास से कंप्यूटर साइंस में बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी पूरी की थी। इससे पहले, उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट में बड़े पैमाने पर जेनेरेटिव रिट्रीवल सिस्टम पर काम किया था।

बायोलॉजिकल और साइंटिफिक मॉडलिंग कैटेगरी में वॉशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी के PhD छात्र, सैमन दहल को रेगुलेटरी जीनोमिक्स के लिए जेनेरेटिव मॉडल्स पर उनके काम के लिए चुना गया।वे बायोलॉजिकल सिस्टम्स में मशीन लर्निंग और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग को लागू करने पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि फेलो के तौर पर चुने जाने के लिए वे बेहद आभारी हैं।

Human-AI के बीच सहयोग और बातचीत के क्षेत्र में, कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी के PhD छात्र सौजस वडुगुरु को AI पर एक सहयोगी टीममेट के तौर पर रिसर्च करने के लिए चुना गया। PhD करने से पहले, वडुगुरु ने इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, हैदराबाद से कम्प्यूटेशनल लिंग्विस्टिक्स में मास्टर ऑफ साइंस की पढ़ाई पूरी की थी।

मल्टीमॉडल और एम्बोडीड इंटेलिजेंस कैटेगरी में, मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के PhD छात्र चाणक्य एकबोटे को मल्टीमॉडल लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स के लिए बुनियादी तरीकों पर काम करने के लिए चुना गया। एकबोटे इससे पहले Microsoft और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरु में रिसर्च से जुड़े पदों पर काम कर चुके हैं।

Microsoft ने बताया कि यह फेलोशिप प्रोग्राम अकादमिक विद्वानों और Microsoft के रिसर्चर्स के बीच खुले रिसर्च सहयोग को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसका मकसद उन चुनौतियों पर काम करना है जिनसे वैज्ञानिक समझ, इनोवेशन और समाज को होने वाले फायदों को आगे बढ़ाया जा सके।

कंपनी ने बताया कि चुने गए फेलो Microsoft की रिसर्च टीमों के साथ मिलकर काम करते हैं और इस प्रोग्राम के तहत उन्हें संस्थागत फंडिंग भी मिलती है।

अन्य खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें न्यू इंडिया अब्रॉड
 

 

Comments

Related

To continue...

Already have an account? Log in

Create your free account or log in