प्रियब्रत मुखर्जी / University of Oklahoma
भारतीय-अमेरिकी शोधकर्ता प्रियब्रत मुखर्जी को यूनिवर्सिटी ऑफ ओक्लाहोमा कॉलेज ऑफ मेडिसिन द्वारा स्टैंटन एल यंग एक्सीलेंस इन रिसर्च अवॉर्ड दिया गया है। यह सम्मान उनके बुनियादी और अनुप्रयुक्त विज्ञान में योगदान के लिए दिया गया है।
बता दें कि प्रियब्रत ने पुणे विश्वविद्यालय से पीएचडी की है। वह पैथोलॉजी विभाग में प्रोफेसर हैं और उन्हें नैनोविज्ञान एवं आणविक ऑन्कोलॉजी में उनके काम के लिए सम्मानित किया गया है। उन्हें सहयोगात्मक शोध को बढ़ावा देने के लिए भी सराहा गया है। इस पुरस्कार में 15,000 डॉलर की राशि भी शामिल है।
जानकारी के लिए आपको बता दें कि यह पुरस्कार उन शोधों को प्रोत्साहित करता है जो ज्ञान को आगे बढ़ाते हैं, मरीजों के इलाज में सुधार लाते हैं और विश्वविद्यालय के शैक्षणिक उद्देश्य को मजबूत करते हैं।
ओयू हेल्थ स्टीफेंसन कैंसर सेंटर में मुखर्जी रिसर्च पार्टनरशिप और कोलैबोरेशन के वरिष्ठ निदेशक हैं। वह नैनोमेडिसिन कार्यक्रम के सह-निदेशक भी हैं। उनका शोध लगातार आर01 ग्रांट से समर्थित रहा है जोकि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की सबसे प्रतिष्ठित फंडिंग माना जाता है।
वह वर्तमान में तीन आर01 ग्रांट के प्रमुख शोधकर्ता हैं। इसके अलावा वह चार अन्य प्रोजेक्ट में सह-प्रमुख शोधकर्ता हैं। उनके सहयोगियों ने उन्हें एक उत्कृष्ट वैज्ञानिक बताया है। उन्होंने कहा कि उनका काम मरीजों के लिए बहुत उपयोगी साबित हो सकता है। उन्होंने उनकी टीम बनाने की क्षमता की भी सराहना की है।
मुखर्जी एक बहु-विषयक प्रयोगशाला का नेतृत्व करते हैं जिसमें युवा शिक्षक, शोधकर्ता और छात्र शामिल हैं। उनका शोध ट्यूमर और उससे जुड़े वातावरण पर केंद्रित है। वह प्रोटीन और नैनोपार्टिकल्स के उपयोग पर भी काम करते हैं। उन्हें पहले भी कई सम्मान मिल चुके हैं।
इनमें जॉर्ज लिन क्रॉस प्रोफेसरशिप और प्रेस्बिटेरियन हेल्थ फाउंडेशन पुरस्कार शामिल हैं। वह कैंसर अनुसंधान के लिए एक विशेष चेयर पद भी संभालते हैं। वह भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के विदेशी फेलो हैं।
वह मेडिकल और बायोमेडिकल इंजीनियरिंग संस्थान में भी नेतृत्व की भूमिका निभाते हैं। मुखर्जी ने 1994 में बर्धमान विश्वविद्यालय से मास्टर डिग्री हासिल की। उन्होंने 2000 में पुणे विश्वविद्यालय से पीएचडी की। इसके बाद उन्होंने टेक्सास क्रिश्चियन यूनिवर्सिटी, हार्वर्ड मेडिकल स्कूल और मेयो क्लिनिक में शोध प्रशिक्षण लिया।
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