ADVERTISEMENT

ADVERTISEMENT

इंडियास्पोरा करेगा प्रवासी दानवीरों का सम्मान, 'हॉल ऑफ गिवर्स' का अनावरण

इस पहल के तहत भारतीय मूल के उन दानदाताओं को सम्मानित किया गया है जिन्होंने जनवरी 2025 से विश्वविद्यालयों, गैर-लाभकारी संस्थाओं और धर्मार्थ संगठनों को 1 मिलियन डॉलर या उससे अधिक का योगदान दिया है।

 (ऊपर बाएं से दाएं) मणि भौमिक, जय चौधरी, अनिल कोचर, जयश्री और विनोद जिवराजका (नीचे से दाएं) मनु और रीका शाह, राज और इंद्रा नूयी, चित्रा और पन्नीर सेल्वम। (ऊपर बाएं से दाएं) मणि भौमिक, जय चौधरी, अनिल कोचर, जयश्री और विनोद जिवराजका (नीचे से दाएं) मनु और रीका शाह, राज और इंद्रा नूयी, चित्रा और पन्नीर सेल्वम। / Indiaspora

इंडियास्पोरा ने एक नई पहल की है। इसका उद्देश्य भारतीय प्रवासी समुदाय के उन सदस्यों को सम्मानित करना है जिन्होंने जनवरी 2025 से विश्वविद्यालयों, गैर-लाभकारी संस्थाओं और धर्मार्थ संगठनों को 10 लाख डॉलर या उससे अधिक का परोपकारी दान दिया है।

इस पहल की घोषणा करते हुए संगठन ने कहा कि 'इंडियास्पोरा हॉल ऑफ गिवर्स' का उद्देश्य वैश्विक भारतीय प्रवासी समुदाय के भीतर परोपकार को बढ़ावा देना और दान कार्यों में अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना है।

यह भी पढ़ें: पेन स्टेट ने भारतीय अमेरिकी विद्वान के 50 साल के कार्यकाल को सम्मानित किया

इंडियास्पोरा ने कहा कि हमें इंडियास्पोरा हॉल ऑफ गिवर्स की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है। यह एक नई पहल है जिसका उद्देश्य प्रवासी समुदाय के उन सदस्यों को सम्मानित करना है जिन्होंने जनवरी 2025 से विश्वविद्यालयों, गैर-लाभकारी संस्थाओं और धर्मार्थ संगठनों को 10 लाख डॉलर या उससे अधिक का महत्वपूर्ण परोपकारी दान दिया है। संगठन ने इस पहल को समुदाय के परोपकारी प्रभाव का उत्सव और कार्रवाई का आह्वान दोनों बताया।

इसमें कहा गया है कि यह हमारे समुदाय के भीतर मौजूद अपार संभावनाओं का उत्सव होने के साथ-साथ कार्रवाई का आह्वान भी है। परोपकारिता प्रवासी समुदायों के लिए उन समाजों को मजबूत करने और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्थायी प्रभाव पैदा करने के सबसे सार्थक तरीकों में से एक है जिन्हें वे अब अपना घर कहते हैं।
 



इंडियास्पोरा ने कहा कि यह सूची अभी तैयार हो रही है और इसमें भारतीय मूल के उन परोपकारियों को सम्मानित किया जाता रहेगा जो विश्व भर में शैक्षणिक संस्थानों, गैर-लाभकारी संस्थाओं, स्वास्थ्य संगठनों और अन्य धर्मार्थ कार्यों में अपना योगदान दे रहे हैं।

पहले हॉल ऑफ गिवर्स में भौतिक विज्ञानी और उद्यमी मणि भौमिक को शामिल किया गया है, जिन्होंने 2025 में यूसीएलए के भौतिकी, खगोल विज्ञान, रसायन विज्ञान और जैव रसायन विभागों में पोस्टडॉक्टोरल अनुसंधान भर्ती का समर्थन करने के लिए 3 मिलियन डॉलर का दान दिया। भौमिक लेजर प्रौद्योगिकी में अपने योगदान के लिए व्यापक रूप से जाने जाते हैं, जिसने लेसिक नेत्र शल्य चिकित्सा का मार्ग प्रशस्त करने में मदद की।

इसके अलावा, साइबर सुरक्षा उद्यमी जय चौधरी और उनकी पत्नी ज्योति को भी सम्मानित किया गया है, जिन्होंने सिनसिनाटी विश्वविद्यालय को 4 मिलियन डॉलर देने का वादा किया है ताकि 2025 के पतझड़ सत्र से लगभग 150 छात्रों के लिए छात्रवृत्ति और शैक्षणिक सहायता कार्यक्रमों का वित्तपोषण किया जा सके। साथ ही, चिकित्सकों जयश्री और विनोद जीवराजका को भी सम्मानित किया गया है, जिन्होंने फरवरी 2026 में यूसीएलए के डेविड गेफेन स्कूल ऑफ मेडिसिन में कार्डियोलॉजी में जीवराजका फैमिली फाउंडेशन चेयर की स्थापना के लिए 2 मिलियन डॉलर के दान की घोषणा की थी।

इस सूची में अनिल और मर्लिन कोचर का नाम भी शामिल है, जिन्होंने मई 2026 में नॉर्थ कैरोलिना स्टेट यूनिवर्सिटी के विल्सन कॉलेज ऑफ टेक्सटाइल्स के दीक्षांत समारोह के दौरान घोषणा की थी कि वे 2025-26 बैच के सभी 176 स्नातकों के शेष छात्र ऋण का भुगतान करेंगे। यह दान विश्वविद्यालय के प्रति परिवार के दीर्घकालिक समर्थन को और मजबूत करता है और अनिल कोचर के पिता की विरासत का सम्मान करता है, जो संस्थान के शुरुआती भारतीय छात्रों में से एक थे।

जसवंत और मीरा मोदी को अक्टूबर 2025 में घोषित 1.5 मिलियन डॉलर के दान के लिए सम्मानित किया गया, जिससे यूसीएलए में जैन अध्ययन और दक्षिण एशिया के धर्मों में पहला स्थायी प्रोफेसरशिप स्थापित किया जाएगा। वहीं, डॉ. विजय और प्रवीणा रामकृष्णन को अप्रैल 2026 में ड्यूक यूनिवर्सिटी के रेडियोलॉजी कार्यक्रमों के माध्यम से रोगी देखभाल, उन्नत इमेजिंग प्रौद्योगिकी और चिकित्सक प्रशिक्षण के समर्थन में 3 मिलियन डॉलर की प्रतिबद्धता के लिए सम्मानित किया गया।

दानदाताओं की सूची में राज और इंदिरा नूयी का नाम भी शामिल है। फरवरी 2025 में, इस दंपती ने येल स्कूल ऑफ मेडिसिन के सर्जरी विभाग को राज और इंदिरा नूयी कैंसर अनुसंधान कोष की स्थापना के लिए 10 लाख डॉलर दान किए। यह कोष स्तन कैंसर के उपचार की विषाक्तता और बोझ को कम करने के उद्देश्य से किए जाने वाले अनुसंधान में सहायता प्रदान करता है। इंदिरा नूयी पेप्सिको की पूर्व अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं।

चित्रा और पन्नीर सेल्वम को भी सम्मानित किया गया है, जिन्होंने अगस्त 2025 में अर्कांसस विश्वविद्यालय को कंप्यूटर मॉडलिंग और कम्प्यूटेशनल मैकेनिक्स में संकाय उत्कृष्टता और अनुसंधान को समर्थन देने के लिए 10 लाख डॉलर का दान दिया।

फरवरी 2025 में शाह फैमिली फाउंडेशन द्वारा घोषित 10 मिलियन डॉलर के दान के लिए नीरज और जिल शाह को भी इस सूची में शामिल किया गया है। इस दान का उद्देश्य मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल और ब्रिघम एंड विमेंस हॉस्पिटल में समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए व्यापक उपचार केंद्र स्थापित करना है।

इस सूची में मनु और रीका शाह को भी सम्मानित किया गया है, जिनके परोपकारी ट्रस्ट ने अगस्त 2025 में प्रोविडेंस सेंट जूड मेडिकल सेंटर को इतिहास का सबसे बड़ा नकद दान दिया, जिससे हृदय रोग स्वास्थ्य के लिए शाह हैप्पीनेस सेंटर की स्थापना हुई।

इंडियास्पोरा ने कहा कि परोपकारी दान केवल वित्तीय उदारता से कहीं अधिक है, और इसे उन समुदायों के प्रति प्रतिबद्धता का प्रदर्शन बताया जहां प्रवासियों ने अपना जीवन बसाया है।

संगठन ने कहा कि जब प्रवासी समुदाय स्थानीय खाद्य बैंकों, स्कूलों, आश्रयों और सामाजिक कार्यों में आगे आते हैं, तो वे विश्वास और आपसी सम्मान के ऐसे पुल बनाते हैं जो कोई नीति या बयानबाजी कभी नहीं बना सकती।

संगठन ने हॉल ऑफ गिवर्स में भविष्य में शामिल किए जाने वाले सदस्यों के लिए नामांकन खोल दिए हैं और कहा है कि उसे उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में वह भारतीय मूल के कई और परोपकारियों को सम्मानित कर सकेगा।

अन्य खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें न्यू इंडिया अब्रॉड
 

Comments

Related