आनंद आरके और सुपना शर्मा / Pulitzer
दो भारतीय पत्रकारों ने भारत में साइबर अपराध को उजागर करने वाली एक खोजी रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट के लिए प्रतिष्ठित पुलित्जर पुरस्कार जीता है।
आनंद आरके और सुपना शर्मा को नैटली ओबिको पियर्सन के साथ सोमवार को ‘इलस्ट्रेटेड रिपोर्टिंग और कमेंट्री’ श्रेणी में विजेता घोषित किया गया। उन्हें यह पुरस्कार ब्लूमबर्ग के लिए तैयार की गई उनकी रिपोर्ट के लिए मिला।
एक और भारतीय पत्रकार देवज्योत घोषाल इसी श्रेणी में फाइनलिस्ट रहे। उन्होंने दक्षिण-पूर्व एशिया में साइबर अपराध और मानव तस्करी का खुलासा किया था। इस काम में अपराधी भारत समेत कई देशों के लोगों को फंसाकर कैंपों में कैद कर लेते हैं और उनसे दूसरे देशों के लोगों के साथ धोखाधड़ी करवाते हैं। वे बैंकॉक में रहते हैं।
हनोई में रहने वाले रिपोर्टर अनिरुद्ध घोषाल ने ‘इंटरनेशनल रिपोर्टिंग’ श्रेणी में पुरस्कार जीता। उन्होंने अमेरिकी बॉर्डर पेट्रोल द्वारा बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जा रहे गुप्त निगरानी उपकरणों की जांच की थी। ये उपकरण पहले सिलिकॉन वैली में बनाए गए थे और बाद में चीन में और विकसित किए गए।
इस रिपोर्ट सीरीज में यह भी बताया गया कि चीन और अन्य देश इन उपकरणों का कैसे इस्तेमाल कर रहे हैं।
अमेरिका के सबसे बड़े पत्रकारिता पुरस्कार, पुलित्जर पुरस्कारों का संचालन यहां कोलंबिया विश्वविद्यालय के ग्रेजुएट स्कूल ऑफ जर्नलिज्म द्वारा किया जाता है।
ब्लूमबर्ग की यह सचित्र रिपोर्ट लखनऊ की न्यूरोलॉजिस्ट रुचिरा टंडन की दिल दहला देने वाली कहानी है। साइबर अपराधियों ने खुद को अधिकारी बताकर उन्हें छह दिनों तक ‘नजरबंद’ जैसा रखा और उनके बैंक खातों से 2.8 करोड़ रुपये ठग लिए।
पुलित्जर पुरस्कार की घोषणा में कहा गया कि इस रिपोर्ट ने निगरानी और डिजिटल ठगी जैसी बढ़ती वैश्विक समस्याओं को उजागर किया।
आनंद मुंबई के एक इलस्ट्रेटर और विज़ुअल आर्टिस्ट हैं, जिन्होंने कई पुरस्कार जीते हैं। वहीं, सुपना शर्मा भारत में एक फ्रीलांस खोजी पत्रकार हैं।
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