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US में लेबर ट्रैफिकिंग से बचे हैरोल्ड डी’सूजा ने भारत में साझा किया अपना अनुभव

भारतीय मूल के डी'सूजा एक वॉलंटियर भी हैं और सिनसिनाटी स्थित ‘आइज ओपन इंटरनेशनल’ के सह-संस्थापक भी हैं।

मानव तस्करी से बचे हैरोल्ड डी’सूजा / Courtesy Photo

मानव तस्करी से बचे हैरोल्ड डी’सूजा ने गुजरात की GSFC यूनिवर्सिटी में छात्रों को संबोधित करते हुए अपने शोषण के अनुभव और बाद में तस्करी से बचे लोगों की सहायता के लिए किए जा रहे काम के बारे में बताया। डी’सूजा पहले ‘यूएस व्हाइट हाउस एडवाइजरी काउंसिल ऑन ह्यूमन ट्रैफिकिंग’ के सह-अध्यक्ष और सदस्य रह चुके हैं। उन्होंने बताया कि वह अमेरिका में श्रम तस्करी और कर्ज की गुलामी का शिकार कैसे बने।

भारतीय मूल के डी'सूजा एक वॉलंटियर भी हैं और सिनसिनाटी स्थित ‘आइज ओपन इंटरनेशनल’ के सह-संस्थापक भी हैं। उन्होंने ‘यंग लीडर्स: ग्लोबल इम्पैक्ट’ नामक सत्र में अपनी बात रखी। यह कार्यक्रम यूनिवर्सिटी के SoT ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया था। इसे यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल सेल ने आयोजित किया और इसमें छात्र व शिक्षक शामिल हुए।

उन्होंने बताया कि तस्कर अक्सर पीड़ितों को कंट्रोल में रखने के लिए उन्हें भटकाते और डराते हैं। डी’सूजा ने बताया कि उनके तस्कर ने उन्हें चेतावनी दी थी कि वह कभी भाग नहीं पाएंगे और अगर उन्होंने कोशिश की तो उन्हें गिरफ्तार कर निर्वासित कर दिया जाएगा।

इन धमकियों के बावजूद उन्होंने अंततः वहां से निकलने में सफलता पाई। बाद में उन्होंने अपने अनुभव को दुनिया भर में जागरूकता फैलाने और पीड़ितों की मदद करने के मिशन में बदल दिया।

डी’सूजा ने गुजरात में अपने बचपन और परिवार से मिले मूल्यों के बारे में भी बात की। उन्होंने बताया कि उनके पिता ट्रेन कंडक्टर के रूप में काम करते थे और एक बार उन्हें डभोई रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर सोना पड़ा था।

अपने संबोधन में उन्होंने मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने छात्रों से मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का आह्वान किया। सत्र का समापन एक संवादात्मक चर्चा के साथ हुआ। इसमें छात्रों ने भय को कैसे दूर करें, कठिन परिस्थितियों में भरोसा कैसे बनाए रखें और आघात के बाद जीवन को कैसे फिर से शुरू करें जैसे प्रश्न पूछे।

छात्रों को चुनौतियों को अवसर में बदलने के लिए प्रेरित करते हुए डी’सूजा ने कहा कि डर को कभी अपनी आवाज दबाने मत दो। आप में से हर व्यक्ति बदलाव लाने की शक्ति रखता है।

कार्यक्रम के अंत में सम्मान समारोह हुआ। इसमें शिल्पा विलिश गामित, जाह्नवी बंसल, रंजिता बनर्जी और GSFC यूनिवर्सिटी के छात्रों ने मानव तस्करी के खिलाफ जागरूकता फैलाने और पीड़ितों की मदद करने के लिए डी’सूजा को सम्मानित किया।

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