अमोल नवाथे / Amol Navathe
यूएस गवर्नमेंट अकाउंटेबिलिटी ऑफिस (GAO) ने घोषणा की कि भारतीय-अमेरिकी डॉक्टर और हेल्थ इकोनॉमिस्ट अमोल नवथे को मेडिकेयर पेमेंट एडवाइजरी कमीशन (MedPAC) का चेयरमैन नियुक्त किया गया है।
MedPAC एक स्वतंत्र और निष्पक्ष कमीशन है जो कांग्रेस को मेडिकेयर पेमेंट पॉलिसी और उससे जुड़े उन मुद्दों पर सलाह देता है जिनका असर लाभार्थियों, हेल्थ प्लान और सर्विस देने वालों पर पड़ता है। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब मेडिकेयर को लंबे समय से वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ रहा है और वैल्यू-बेस्ड केयर मॉडल को बढ़ाने की कोशिशें जारी हैं।
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संयुक्त राज्य अमेरिका के कार्यवाहक कॉम्पट्रोलर जनरल और GAO के प्रमुख ओरिस डब्ल्यू. ब्राउन ने कहा कि MedPAC लगभग तीस वर्षों से मेडिकेयर प्रोग्राम से जुड़े सभी मुद्दों पर नीति-निर्माताओं को डेटा-आधारित सुझाव देता आ रहा है।
ब्राउन ने कहा कि मुझे भरोसा है कि नया नेतृत्व, कमीशन के सदस्यों और कर्मचारियों के साथ मिलकर, ठोस और सबूत-आधारित जानकारी और सुझावों के साथ कांग्रेस की चर्चाओं में सहयोग करना जारी रखेगा।
अपनी नियुक्ति पर टिप्पणी करते हुए नवथे ने कहा कि इस भूमिका को संभालने और कांग्रेस, मेडिकेयर प्रोग्राम और इसके लाभार्थियों के समर्थन में MedPAC के काम का नेतृत्व करने पर मुझे गर्व है। नवाथे पहले MedPAC कमिश्नर और वाइस चेयरमैन रह चुके हैं।
नवथे यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिलवेनिया के पेरेलमन स्कूल ऑफ मेडिसिन में मेडिकल एथिक्स और हेल्थ पॉलिसी के प्रोफेसर हैं और व्हार्टन स्कूल में हेल्थकेयर मैनेजमेंट और इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर हैं। वह लियोनार्ड डेविस इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ इकोनॉमिक्स में सीनियर फेलो के तौर पर भी काम करते हैं।
उनकी रिसर्च हेल्थ केयर फाइनेंसिंग, बिहेवियरल इकोनॉमिक्स और ऐसे इंसेंटिव (प्रोत्साहन) के डिजाइन पर केंद्रित है जिनका मकसद लागत को नियंत्रित करते हुए मरीजों के इलाज के नतीजों को बेहतर बनाना है। उन्होंने पहले यूनिवर्सिटी ऑफ़ पेन्सिलवेनिया में 'द पैरिटी सेंटर' की स्थापना की थी और SCAN हेल्थ प्लान और हवाई मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन के बोर्ड में भी काम किया है; ये दोनों ही मेडिकेयर एडवांटेज प्लान चलाते हैं।
चेयरमैन के तौर पर, नवथे की जिम्मेदारी यह तय करना होगी कि इस प्रोग्राम के लिए फंड कैसे जुटाया जाए, जो अब 6.7 करोड़ से अधिक लोगों को बीमा कवर देता है, और साथ ही लाखों बुजुर्गों और दिव्यांग लोगों के लिए सर्विस की उपलब्धता और गुणवत्ता को बनाए रखा जाए।
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