सचिन शिवराम / UW-Green Bay
विस्कॉन्सिन एल्युमिनियम फाउंड्री के सीईओ सचिन शिवराम ने यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन-ग्रीन बे की 2026 बैच के छात्रों से कहा कि एआई के दौर में सफलता पाने के लिए लोगों को समझना सबसे जरूरी होगा।
उन्होंने कहा कि भविष्य की दुनिया में वही लोग आगे बढ़ेंगे, जो उन कौशलों में मजबूत होंगे जिन्हें तकनीक कभी पूरी तरह नहीं दोहरा सकती। 16 मई को विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए शिवराम ने कहा कि भविष्य की नौकरियां लोगों को समझने के इर्द-गिर्द होंगी। इस एआई युग में सिर्फ नौकरी ही नहीं बल्कि जीवन का उद्देश्य पाने के लिए आपको उन चीजों में उत्कृष्ट बनना होगा जो यह नई तकनीक नहीं कर सकती।
अपने भाषण में उन्होंने अपनी लिबरल आर्ट्स शिक्षा और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में 20 साल के अनुभव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उद्योगों को बदल सकता है, लेकिन वह इंसानी अनुभव और सहानुभूति की जगह नहीं ले सकता। उन्होंने छात्रों से कहा कि मानविकी, कला और सामाजिक विज्ञान आज भी बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये हमें सिखाते हैं कि किसी दूसरे इंसान के जीवन को भीतर से महसूस कैसे किया जाए।
शिवराम ने यह भी बताया कि एआई द्वारा बनाए गए काम और इंसानों द्वारा किए गए काम में फर्क करना अब मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि उन्हें तब आश्चर्य हुआ जब पता चला कि स्पॉटिफाई पर जो संगीत उन्हें पसंद आया था वह पूरी तरह एआई द्वारा बनाया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि कोडिंग जैसे कौशल, जिन्हें पहले बहुत विशेष माना जाता था, अब जनरेटिव एआई टूल्स की वजह से अधिक आसान हो रहे हैं।
तकनीकी प्रगति के बावजूद शिवराम ने कहा कि धातु उद्योग में उनका अपना करियर तकनीकी ज्ञान से नहीं, बल्कि लोगों से रिश्ते बनाने और उन्हें सुनने की क्षमता से बना।
उन्होंने कहा कि मैं पिछले 20 वर्षों से धातु उद्योग में काम कर रहा हूं जहां मेरे साथ बहुत प्रतिभाशाली धातु विशेषज्ञ और इंजीनियर रहे हैं। मैंने अपने जीवन में कभी कोई तकनीकी खोज नहीं की। मेरा करियर लोगों के साथ रिश्तों से बना है, जहां मेरा असली योगदान सिर्फ सुनना और समझने की कोशिश करना रहा है।
शिवराम ने अपने बचपन को भी याद किया। उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता दक्षिण भारत के बेंगलुरु और मैसूर से अमेरिका आए थे। वे वियतनाम युद्ध के समय विस्कॉन्सिन आकर बस गए थे।
उन्होंने कहा कि एक प्रवासी परिवार में पले-बढ़े होने और अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोगों के प्रति उनके माता-पिता की जिज्ञासा ने उनकी सोच और नेतृत्व शैली को गहराई से प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि मेरे माता-पिता हमें हमेशा मेहनत से पढ़ने के लिए कहते थे। लेकिन अपने उदाहरण से उन्होंने मुझे जो सबसे बड़ी चीज दी, वह थी इंसानियत के प्रति जिज्ञासा दूसरों का जीवन कैसा होता है?
सचिन शिवराम 2019 से विस्कॉन्सिन एल्युमिनियम फाउंड्री का नेतृत्व कर रहे हैं। वह ग्रीन बे पैकर्स, ग्राफटेक इंटरनेशनल लिमिटेड, ब्रॉडविंड इंक. और लॉज कास्ट आयरन जैसी बड़ी कंपनियों के बोर्ड में भी शामिल हैं। उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से इतिहास और साहित्य में डिग्री हासिल की और बाद में येल लॉ स्कूल से कानून की पढ़ाई की।
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