उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने H-1B वीजा प्रोग्राम से जुड़े कथित फ्रॉड के खिलाफ नई कार्रवाई का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी लेबर डिपार्टमेंट ने उन विदेशी कंपनियों के खिलाफ दर्जनों समन और जांच शुरू की हैं, जिन पर अमेरिकी वर्कर्स की सैलरी कम करने के लिए सिस्टम का गलत इस्तेमाल करने का आरोप है।
9 जुलाई को विस्कॉन्सिन के मिल्वौकी में फ्रॉड-विरोधी कार्यक्रम में वेंस ने कहा कि ट्रंप प्रशासन अपने बड़े फ्रॉड-विरोधी अभियान को सरकारी खर्च वाले प्रोग्राम से आगे बढ़ाकर रोजगार-आधारित वीजा तक ले जा रहा है।
उन्होंने कहा कि हमारे पास H-1B वीजा प्रोग्राम नाम का एक प्रोग्राम है, और इससे पता चलता है कि फ्रॉड रोकने वाली टास्क फोर्स का दायरा कितना बड़ा है। हम आपके टैक्स के पैसे की रक्षा के लिए लड़ रहे हैं, लेकिन हम यह भी पक्का कर रहे हैं कि धोखेबाज इन वीजा प्रोग्राम का फायदा न उठा सकें।
प्रोग्राम के असली मकसद के बारे में बताते हुए वेंस ने कहा कि इसे इसलिए बनाया गया था ताकि कोई शानदार टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट, शानदार साइंटिस्ट या शानदार डॉक्टर अमेरिका में काम कर सके।
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उन्होंने कहा लेकिन आप जानते हैं, आजकल बहुत ज्यादा ऐसा हो रहा है कि बड़ी कंपनियां और विदेशों में बैठे धोखेबाज इस प्रोग्राम का इस्तेमाल अमेरिकी वर्कर्स की सैलरी कम करने के लिए कर रहे हैं।
नई कार्रवाई का ऐलान करते हुए वेंस ने कहा कि तो, आप जानते हैं कि हम ट्रंप प्रशासन में क्या कर रहे हैं? हम कह रहे हैं कि अब और नहीं: अगर आप उस वीजा प्रोग्राम का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं, तो आपको अमेरिका में आने की इजाजत नहीं मिलेगी।
उन्होंने कहा कि आज, मुझे यह बताते हुए गर्व हो रहा है कि फेडरल लेबर डिपार्टमेंट ने उन विदेशी धोखेबाजों के खिलाफ दर्जनों समन और जांच शुरू कर दी हैं जो H-1B वीजा प्रोग्राम का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं।
वेंस ने इस कदम को प्रशासन की उस बड़ी कोशिश का हिस्सा बताया जिसका मकसद यह पक्का करना है कि सरकारी प्रोग्राम अपने मकसद के लिए इस्तेमाल हों, न कि उनका गलत फायदा उठाया जाए।
उन्होंने कहा कि एक सीधा सा उसूल है... अमेरिकी नौकरियां अमेरिकी वर्कर्स को मिलनी चाहिए, न कि विदेशी धोखेबाजों को, और लेबर डिपार्टमेंट इसके खिलाफ लड़ रहा है।
वेंस ने जांच के दायरे में आने वाली कंपनियों, देशों या लोगों के नाम नहीं बताए, और न ही कथित उल्लंघनों या समन के कानूनी आधार के बारे में कोई जानकारी दी। H-1B प्रोग्राम, जिसे फेडरल सरकार चलाती है, अमेरिकी एम्प्लॉयर्स को खास क्षेत्रों- जैसे टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर और वैज्ञानिक रिसर्च- में बहुत अधिक हुनरमंद विदेशी प्रोफेशनल्स को कुछ समय के लिए काम पर रखने की इजाजत देता है।
H-1B प्रोफेशनल्स के मामले में भारत अब तक का सबसे बड़ा स्रोत रहा है। हाल के सालों में, H-1B मंजूरी पाने वालों में भारतीय नागरिकों की संख्या सबसे ज़्यादा रही है, और भारतीय इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी कंपनियां तथा U.S. की टेक्नोलॉजी कंपनियां इस प्रोग्राम का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करने वालों में शामिल हैं।
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