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इस नीति का असर यह हो सकता है कि छात्र अपनी असली पहचान छुपाएं और भविष्य में अन्य देशों जैसे कनाडा, ऑस्ट्रेलिया या यूरोप में दाखिला लेने का रास्ता अपनाएँ, जहां प्राइवेसी नियम कम कड़े हैं।

सोशल मीडिया से भारतीय छात्रों पर शिकंजा
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