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अमेरिका ने कहा- शेख हसीना को सत्ता से बाहर करने में उसकी कोई भूमिका नहीं

व्हाइट हाउस का कहना है कि बांग्लादेश की स्थिति में हमारी कोई संलिप्तता नहीं है। ऐसी कोई भी रिपोर्ट या अफवाह कि इन घटनाओं में संयुक्त राज्य सरकार शामिल थी, पूरी तरह से झूठी हैं।

 बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना 17 फरवरी, 2024 को म्यूनिख, जर्मनी में वार्षिक म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन को संबोझित करते हुए।  बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना 17 फरवरी, 2024 को म्यूनिख, जर्मनी में वार्षिक म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन को संबोझित करते हुए। / Reuters/Wolfgang Rattay

व्हाइट हाउस का कहना है कि बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटाने में संयुक्त राज्य अमेरिका की कोई भूमिका नहीं थी। हसीना पिछले दिनों सियासी संकट के बाद अपना पद छोड़कर दक्षिण एशियाई देश में शरण लिये हुए हैं। 

बांग्ला संकट में अमेरिकी संलिप्तता के कथित दावों के बारे में पूछे जाने पर व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरिन जीन-पियरे ने कहा कि हमारी कोई भागीदारी नहीं है। कोई भी रिपोर्ट या अफवाह कि संयुक्त राज्य सरकार इन घटनाओं में शामिल थी, पूरी तरह से झूठी है।

11 अगस्त को भारत में एक अखबार की एक रिपोर्ट में हसीना के हवाले से कहा गया था कि अमेरिका ने उन्हें हटाने में भूमिका निभाई क्योंकि वह बंगाल की खाड़ी में बांग्लादेश के सेंट मार्टिन द्वीप पर नियंत्रण चाहता था। अखबार ने कहा कि हसीना ने अपने करीबी सहयोगियों के जरिए उस तक यह संदेश पहुंचाया था।

वहीं, हसीना के बेटे सजीब वाजेद ने 11 अगस्त को X पर एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने (हसीना) कभी ऐसा कोई बयान नहीं दिया। व्हाइट हाउस ने कहा कि हमारा मानना ​​है कि बांग्लादेशी लोगों को बांग्लादेशी सरकार का भविष्य तय करना चाहिए और हम वहीं खड़े हैं।

नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बांग्लादेश में अंतरिम सरकार ने एशियाई राष्ट्र में चुनाव कराने के उद्देश्य से 8 अगस्त को शपथ ली। कुछ समूहों के लिए सरकारी नौकरियों का एक बड़ा हिस्सा आरक्षित करने वाले आरक्षण के खिलाफ पिछले महीने छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद बांग्लादेश प्रदर्शनों और हिंसा से घिर गया था, जो हसीना को बाहर करने के अभियान में बदल गया।

हसीना ने जनवरी में उस चुनाव में लगातार चौथी बार जीत हासिल की थी जिसका विपक्ष ने बहिष्कार किया था और जिसे अमेरिकी विदेश विभाग ने स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं बताया था। बांग्लादेश छोड़कर 15 साल के अपने निर्बाध शासन को खत्म कर हसीना नई दिल्ली चली गई हैं।
 

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