राष्ट्रपति ट्रंप / REUTERS/Brian Snyder
एक संघीय न्यायाधीश ने राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप द्वारा नए H-1B वीजा आवेदनों पर लगाए गए विवादास्पद 100,000 डॉलर के शुल्क को रद्द कर दिया है। न्यायाधीश ने फैसला सुनाया कि प्रशासन ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कांग्रेस की मंजूरी के बिना एक प्रकार का गैरकानूनी कर लगाया है।
प्रशासन के आव्रजन एजेंडे के लिए एक बड़ा झटका देते हुए, मैसाचुसेट्स के अमेरिकी जिला न्यायाधीश लियो टी. सोरोकिन ने इस नीति को चुनौती देने वाले 20 राज्यों के गठबंधन का पक्ष लिया और इसे राष्ट्रव्यापी स्तर पर रद्द कर दिया।
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सोरोकिन ने लिखा कि अदालत पाती है कि यह नीति कांग्रेस द्वारा आवश्यक अधिकार दिए बिना H-1B आवेदनों पर कर लगाती है। प्रतिवादियों को H-1B आवेदनों पर 100,000 डॉलर का कर लागू करने के लिए कोई वैधानिक अधिकार नहीं है।
यह फैसला सितंबर 2025 के राष्ट्रपति के उस आदेश को पलट देता है जिसमें नए H-1B आवेदन दाखिल करने वाले नियोक्ताओं को अतिरिक्त 100,000 डॉलर का भुगतान करने की आवश्यकता थी। प्रशासन ने तर्क दिया था कि H-1B कार्यक्रम का दुरुपयोग अमेरिकी श्रमिकों को विस्थापित करने और प्रमुख क्षेत्रों, विशेष रूप से विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित के क्षेत्रों में मजदूरी को कम करने के लिए किया जा रहा था।
व्हाइट हाउस ने किया ट्रंप का बचाव, अदालत के फैसले को चुनौती देने की तैयारी
अमेरिकी अदालत से 1 लाख डॉलर का H-1B वीजा शुल्क रद्द होने के बाद व्हाइट हाउस ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बचाव किया है। अमेरिकी संघीय अदालत ने वीजा शुल्क को यह करते हुए रद्द कर दिया कि प्रशासन ने अपनी अधिकार सीमा से बाहर जाकर काम किया और एक गैर-कानूनी टैक्स लगाया।
अदालत के फैसले के बाद व्हाइट हाउस की प्रवक्ता टेलर रोजर्स ने आईएएनएस से कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के पास किसी भी श्रेणी के विदेशियों के प्रवेश को रोकने का स्पष्ट कानूनी अधिकार है, जिन्हें वे अमेरिका के सर्वोत्तम हित में नहीं मानते हैं और उन्होंने ठीक यही किया।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि H-1B प्रोग्राम का दशकों से दुरुपयोग हो रहा था और राष्ट्रपति ट्रंप ने आखिरकार इसे ठीक करने के लिए कदम उठाया। वाशिंगटन में एक फेडरल जज पहले ही लगभग ऐसे ही एक आदेश को सही ठहरा चुके हैं और प्रशासन को भरोसा है कि अपील करने पर यह आदेश पलट दिया जाएगा।
व्हाइट हाउस ने यह नहीं बताया कि वह कब अपील करेगा। हालांकि, प्रशासन के अधिकारियों ने संकेत दिया कि वे इस उपाय का बचाव करना जारी रखेंगे, क्योंकि यह H-1Bप्रोग्राम पर निगरानी कड़ी करने की राष्ट्रपति ट्रंप की व्यापक कोशिश का हिस्सा है।
यह प्रतिक्रिया कुछ घंटों बाद आई, जब मैसाचुसेट्स के अमेरिकी जिला न्यायाधीश लियो टी. सोरोकिन ने इस नीति को अमान्य कर दिया और इसे पूरे देश में रद्द कर दिया। अपने कड़े शब्दों वाले फैसले में सोरोकिन ने निष्कर्ष निकाला कि प्रशासन ने कांग्रेस की अनुमति के बिना टैक्स लगाया।
जज ने अपने फैसले में लिखा, "अदालत का मानना है कि यह पॉलिसी कांग्रेस की ओर से जरूरी अधिकार दिए बिना एच-1बी याचिकाओं पर टैक्स लगाती है। ऐसी कोई विधायी शक्तियां नहीं हैं जो प्रतिवादियों को एच-1बी याचिकाओं पर एक लाख डॉलर शुल्क लागू करने का अधिकार देती हों।"
अदालत ने प्रशासन की इस दलील को खारिज कर दिया कि इमिग्रेशन कानून के तहत राष्ट्रपति की व्यापक शक्तियां इस फीस की अनुमति देती हैं। जज ने कहा कि प्रशासन की ओर से बताए गए इमिग्रेशन कानून राष्ट्रपति को ऐसा शुल्क लगाने का अधिकार नहीं देते हैं।
इस फैसले ने विशेष रूप से सितंबर 2025 में राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से हस्ताक्षरित उस उद्घोषणा के कानूनी आधार को चुनौती दी, जिसमें नए एच-1बी याचिकाएं दाखिल करने वाले नियोक्ताओं को अतिरिक्त एक लाख डॉलर का भुगतान करना जरूरी था। अदालत ने उन एजेंसियों की भी आलोचना की, जिन्होंने पॉलिसी को लागू किया था।
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