तुलसी गबार्ड / Reuters
अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर तुलसी गबार्ड ने इस्लामी कट्टरवाद को दुनिया की सुरक्षा और आजादी के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया है। उनका यह बयान 14 दिसंबर को ऑस्ट्रेलिया के बॉन्डी बीच पर हनुक्का उत्सव के दौरान हुई हिंसक घटना के बाद आया है जिसमें कई लोग मारे गए थे।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में तुलसी गबार्ड ने इस घटना को दुखद इस्लामी आतंकी हमला बताया और कहा कि यह किसी के लिए भी हैरानी की बात नहीं होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि ऑस्ट्रेलिया में कट्टरपंथी तत्वों की बड़ी संख्या में घुसपैठ हुई है जिनका उद्देश्य ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे देशों का इस्लामीकरण करना है।
गबार्ड ने लिखा कि इस्लामी कट्टरवाद अमेरिका ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की आजादी, सुरक्षा और समृद्धि के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि यूरोप के लिए शायद अब बहुत देर हो चुकी है और ऑस्ट्रेलिया के लिए भी हालात गंभीर होते जा रहे हैं लेकिन अमेरिका के पास अभी समय है कि वह इस खतरे को रोके।
अपने बयान में तुलसी गबार्ड ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि उनकी सरकार सीमा सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है और ज्ञात व संदिग्ध आतंकियों को देश से बाहर निकालने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने बड़े पैमाने पर बिना जांच के होने वाले प्रवासन को भी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया।
इस बीच ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी बॉन्डी बीच की घटना की जांच कर रहे हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि हमले के पीछे कौन था और उसका मकसद क्या था। ऑस्ट्रेलियाई नेताओं और यहूदी समुदाय के प्रतिनिधियों ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे नफरत और धार्मिक असहिष्णुता से प्रेरित हिंसा करार दिया है।
तुलसी गबार्ड के बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तीखी बहस छिड़ गई है। आलोचकों ने उनके बयान को प्रवासन विरोधी नैरेटिव से जोड़कर देखा है, जबकि समर्थकों का कहना है कि वह राष्ट्रीय और वैश्विक सुरक्षा को लेकर वास्तविक चिंताओं को सामने रख रही हैं।
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT
Comments
Start the conversation
Become a member of New India Abroad to start commenting.
Sign Up Now
Already have an account? Login