न्यूयॉर्क स्थित भारत के महावाणिज्य दूतावास ने अमेरिका के प्रमुख विश्वविद्यालयों के साथ एक उच्च-स्तरीय गोलमेज बैठक आयोजित की। / X/@IndiainNewYork
न्यूयॉर्क में भारतीय वाणिज्य दूतावास ने अमेरिका की प्रमुख यूनिवर्सिटीज के साथ एक हाई-लेवल राउंडटेबल बैठक आयोजित की। इस बैठक में शिक्षा क्षेत्र में भारत-अमेरिका सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा हुई। इसमें एक प्रतिनिधिमंडल शामिल था, जिसका नेतृत्व के. राजारामन कर रहे थे।
बैठक में न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी, कोलंबिया यूनिवर्सिटी, रटगर्स यूनिवर्सिटी, स्टोनी ब्रुक यूनिवर्सिटी, नॉर्थईस्टर्न यूनिवर्सिटी, न्यू जर्सी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूयॉर्क जैसे संस्थानों के प्रतिनिधि मौजूद थे। न्यूयॉर्क में भारत के कॉन्सुल जनरल बिनय श्रीकांत प्रधान ने कार्यक्रम की शुरुआत की।
A roundtable interaction with leading U.S.-based universities was held at Consulate General of India, New York (@indiainnewyork), bringing together key academic stakeholders and policymakers.
— India in New York (@IndiainNewYork) March 28, 2026
A high-level delegation led by Shri K. Rajaraman, Chairperson of International… pic.twitter.com/s2m3ViGR6u
उन्होंने कहा कि भारत में उच्च शिक्षा की मांग तेजी से बढ़ रही है और अमेरिका के साथ साझेदारी के बड़े अवसर मौजूद हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की बड़ी छात्र संख्या की जरूरतों को पूरा करने के लिए वैश्विक सहयोग जरूरी है। अपने मुख्य संबोधन में के. राजारामन ने गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (GIFT City) के बढ़ते महत्व पर बात की। उन्होंने इसे एक ऐसा वैश्विक केंद्र बताया, जो वित्त और शिक्षा दोनों क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
गुजरात के गांधीनगर में स्थित GIFT सिटी भारत का पहला ग्रीनफील्ड स्मार्ट सिटी और इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर है। यहां बैंकिंग, कैपिटल मार्केट, इंश्योरेंस और फिनटेक जैसे क्षेत्रों में 1,150 से ज्यादा संस्थाएं काम कर रही हैं। यहां का बैंकिंग सिस्टम 100 अरब डॉलर से ज्यादा का है।
राजारामन ने कहा कि GIFT सिटी का एकीकृत नियम और मजबूत सिस्टम विदेशी यूनिवर्सिटीज़ को भारत में कैंपस खोलने के लिए आकर्षित कर रहा है। वॉशिंगटन डी.सी. स्थित भारतीय दूतावास के आर्थिक मंत्री आशुतोष जिंदल ने भी इस बैठक में हिस्सा लिया।
उन्होंने कहा कि सरकार विदेशी यूनिवर्सिटीज़ को भारत में लाने के लिए नीतियों को और बेहतर बना रही है। उन्होंने बताया कि नियमों में सुधार, प्रोत्साहन और निवेश के अनुकूल माहौल तैयार किया जा रहा है, ताकि अंतरराष्ट्रीय संस्थान भारत में अपनी मौजूदगी बढ़ा सकें।
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