जन्मसिद्ध नागरिकता आदेश / NPR
अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने जन्मसिद्ध नागरिकता (बर्थराइट सिटिजनशिप) को खत्म करने वाले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकारी आदेश को असंवैधानिक करार दिया है।
इस फैसले के बाद कई डेमोक्रेटिक नेताओं ने इसका स्वागत करते हुए इसे अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन की जीत और प्रवासी परिवारों के लिए बड़ी राहत बताया है।
वर्जीनिया से सांसद सुहास सुब्रमण्यम ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सही माना है कि राष्ट्रपति ट्रंप का यह कार्यकारी आदेश संविधान के खिलाफ था। उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि अदालतों ने माना कि राष्ट्रपति ट्रंप का जन्मसिद्ध नागरिकता खत्म करने वाला कार्यकारी आदेश देशभर के प्रवासी परिवारों के बच्चों से नागरिकता छीनने की एक स्पष्ट और असंवैधानिक कोशिश थी।
— Rep. Suhas Subramanyam (VA-10) (@RepSuhas) June 30, 2026
सुब्रमण्यम ने कहा कि प्रवासियों ने अमेरिका की सेवा की है और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि वे भी अमेरिकी हैं। उन्होंने आगे कहा कि वे व्यापक और व्यावहारिक आव्रजन सुधार (इमिग्रेशन रिफॉर्म) के लिए संघर्ष जारी रखेंगे और प्रशासन द्वारा किए जा रहे आव्रजन संबंधी अधिकारों के अतिक्रमण का विरोध करेंगे।
वहीं वॉशिंगटन से सांसद प्रमिला जयपाल ने भी फैसले का स्वागत किया। उन्होंने एक्स पर लिखा कि डोनाल्ड ट्रंप कोई राजा नहीं हैं और वे सिर्फ एक हस्ताक्षर करके संविधान नहीं बदल सकते। 14वां संशोधन जन्मसिद्ध नागरिकता की गारंटी देता है और इसे खत्म करने की कोशिश उनके प्रवासी-विरोधी एजेंडे का हिस्सा थी।
उन्होंने आगे कहा कि आज का फैसला साफ करता है कि अगर आपका जन्म अमेरिका में हुआ है, तो आप अमेरिकी हैं। बात बिल्कुल स्पष्ट है।
Donald Trump is not a king, and he cannot, with the stroke of a pen, change our Constitution.
— Rep. Pramila Jayapal (@RepJayapal) June 30, 2026
Today’s Supreme Court ruling on birthright citizenship rightly reaffirms that if you are born in America, you are American, plain and simple. pic.twitter.com/xVMDVa0H5e
प्रमिला जयपाल ने उम्मीद जताई कि अब यह मुद्दा हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा। उन्होंने ट्रंप से अपील की कि वे ऐसे कार्यकारी आदेश जारी करना बंद करें जिन्हें उन्होंने गैरकानूनी, प्रवासी-विरोधी और हजारों परिवारों में डर पैदा करने वाला बताया।
उन्होंने कहा कि यह क्रूरता अब खत्म होनी चाहिए। कम से कम इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के अधिकांश न्यायाधीशों ने सही फैसला लिया है।
कैलिफोर्निया से सांसद एमी बेरा ने भी फैसले का स्वागत किया, हालांकि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के कई अन्य फैसलों की आलोचना भी की।
एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि वाह इस बार सुप्रीम कोर्ट ने जन्मसिद्ध नागरिकता की रक्षा करके सही फैसला लिया है। उन्होंने आगे कहा कि कम से कम अब मुझे पता है कि मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स संविधान पढ़ना जानते हैं। उन्होंने कई दूसरे मामलों में गलत फैसले दिए हैं, लेकिन आज उन्होंने सही फैसला लिया।
Wow. This Supreme Court got something right for once by protecting birthright citizenship.
— Ami Bera, M.D. (@RepBera) June 30, 2026
At least I know John Roberts knows how to read the Constitution. pic.twitter.com/ZIvObFvc8f
मिशिगन से सांसद श्री थानेदार ने भी एक्स पर इस फैसले का स्वागत किया। वहीं वर्जीनिया की उप-राज्यपाल गजाला हाशमी ने कहा कि यह फैसला संविधान के सबसे महत्वपूर्ण वादों में से एक की पुष्टि करता है।
उन्होंने कहा कि आज का फैसला 14वें संशोधन के उस मूल सिद्धांत की पुष्टि करता है कि अमेरिका में जन्म लेने वाला हर बच्चा अमेरिकी नागरिक है, चाहे उसके माता-पिता की आव्रजन स्थिति कुछ भी हो।
उन्होंने आगे कहा कि यह फैसला संविधान की रक्षा करता है, हजारों परिवारों को डर और अनिश्चितता से बचाता है और यह स्पष्ट करता है कि नागरिकता किसी राजनीतिक दल का हथियार नहीं हो सकती।
दरअसल, 30 जून को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह कार्यकारी आदेश, जिसके तहत जन्म के आधार पर मिलने वाली स्वतः अमेरिकी नागरिकता (बर्थराइट सिटिजनशिप) को समाप्त करने की कोशिश की गई थी, संविधान के 14वें संशोधन का उल्लंघन करता है।
ट्रंप के आदेश में प्रस्ताव था कि अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को तभी नागरिकता मिले, जब उनके माता-पिता में से कम से कम एक अमेरिकी नागरिक या वैध स्थायी निवासी (ग्रीन कार्ड धारक) हो। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने 1898 के ऐतिहासिक 'यूनाइटेड स्टेट्स बनाम वोंग किम आर्क' मामले में स्थापित संवैधानिक व्यवस्था को बरकरार रखा है और इसे ट्रंप प्रशासन की आव्रजन नीति के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
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