सीनेटर टॉम कॉटन / X/ Tom Cotton
अर्कांसस के राज्य सीनेटर टॉम कॉटन ने डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी यानी DHS से U वीजा कार्यक्रम के कथित बड़े पैमाने पर दुरुपयोग की जांच करने की मांग की है। U वीजा कार्यक्रम कुछ विशेष अपराधों के पीड़ितों को अस्थायी कानूनी दर्जा देता है यदि वे कानून प्रवर्तन एजेंसियों की जांच में मदद करते हैं।
27 अप्रैल को मार्कवेन मुलिन को लिखे एक पत्र में कॉटन ने कहा कि यह कार्यक्रम सैकड़ों-हजारों अवैध प्रवासियों के लिए एक तरह का वास्तविक माफी कार्यक्रम बनता दिख रहा है।
रिपब्लिकन नेता कॉटन ने कथित फर्जी दावों से जुड़े मामलों का हवाला दिया और सवाल उठाया कि क्या मौजूदा प्रमाणन प्रक्रिया वास्तव में यह सुनिश्चित करती है कि आवेदक इस वीजा का पात्र हैं या नहीं। रिपोर्टों के अनुसार आपराधिक संगठनों ने नकली अपराधों की घटनाएं तैयार कीं ताकि धोखेबाज U वीजा के लिए योग्य बन सकें।
कॉटन ने यह भी कहा कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों को U वीजा दावों को सही मानकर चलना पड़ता है और उनके पास जांच में बहुत सीमित अधिकार होते हैं। उन्होंने 4 लाख से अधिक लंबित याचिकाओं के बैकलॉग की ओर भी ध्यान दिलाया और प्रक्रिया में हो रही देरी पर चिंता जताई।
उनका कहना था कि कुछ आवेदकों पर पहले निर्वासन की कार्रवाई चल चुकी थी और कुछ मामलों में उनके आपराधिक रिकॉर्ड भी थे। कॉटन ने तर्क दिया कि इससे कार्यक्रम का मूल उद्देश्य कमजोर हो सकता है। सीनेटर ने डीएचएस से यह भी पूछा कि प्रमाणन प्रक्रिया में कौन-कौन सी संभावित खामियां हैं? क्या लाभ देने से पहले पर्याप्त पृष्ठभूमि जांच की जाती है? और लंबित मामलों को कम करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि कई सालों से अवैध प्रवासी U वीजा कार्यक्रम का फायदा उठाकर गलत तरीके से स्थायी कानूनी दर्जा हासिल कर रहे हैं। मैं @SecMullinDHS से इसकी जांच करने की मांग कर रहा हूं।
आपको बताएं कि U वीजा कार्यक्रम को कांग्रेस ने वर्ष 2000 में शुरू किया था। इसके तहत घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न और मानव तस्करी जैसे अपराधों के पीड़ितों को अमेरिका में अस्थायी रूप से रहने की अनुमति दी जाती है। ऐसा भी तब होता है जब वे जांच एजेंसियों की मदद करते हैं। कुछ सालों बाद उन्हें स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड का रास्ता भी मिल सकता है। इस कार्यक्रम में हर साल केवल 10,000 मुख्य वीजा जारी किए जा सकते हैं, जिसकी वजह से प्रक्रिया में लंबा इंतजार और बड़ी देरी होती है।
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