प्रियंका चोपड़ा / Instagram
प्रियंका चोपड़ा जोनस को 2026 की नेशनल जियोग्राफिक 33 सूची में शामिल किया गया है। यह सूची उन वैश्विक बदलाव लाने वाले लोगों को सम्मानित करती है जो स्वास्थ्य, पर्यावरण और सामाजिक क्षेत्रों में प्रभाव डाल रहे हैं। प्रियंका को विशेष रूप से मधुमेह के प्रति जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों के लिए पहचाना गया है। भारत में 10 करोड़ से अधिक लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं और कई मामलों में इसका समय पर पता नहीं चल पाता।
नेशनल जियोग्राफिक ने इस सूची की घोषणा करते हुए कहा कि हम नेशनल जियोग्राफिक 33 प्रस्तुत कर रहे हैं, जो उन असाधारण लोगों को सम्मानित करता है जो हमारे समय की सबसे महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना कर रहे हैं और सार्थक प्रगति कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि ये दुनिया भर के ऐसे लोग हैं जो नई सोच और त्वरित कार्रवाई में विश्वास रखते हैं और बदलाव की अगुवाई कर रहे हैं।
भारतीय सेना में डॉक्टर माता-पिता के घर पली-बढ़ी प्रियंका ने अपने करियर में कई उपलब्धियां हासिल की हैं। वह एक ब्यूटी क्वीन से लेकर दुनिया की सबसे चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल हुईं। उन्होंने ‘क्वांटिको’ के साथ अमेरिकी नेटवर्क ड्रामा में मुख्य भूमिका निभाने वाली पहली दक्षिण एशियाई महिला बनकर इतिहास भी रचा।
शुरुआत में प्रियंका को मधुमेह के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। लेकिन उनके पति निक जोनस को भी 13 साल की उम्र में टाइप 1 डायबिटीज हुआ था। उनसे जुड़ने के बाद उन्होंने इस विषय को गहराई से समझा। प्रियंका ने इस बीमारी से जुड़े कलंक को खत्म करने और समय पर जांच की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस विषय पर जागरूकता अभी भी कम है।
गैर-लाभकारी संगठन ‘बियॉन्ड टाइप 1’ के साथ अपने काम के माध्यम से उन्होंने जागरूकता अभियान चलाए और लोगों को समय पर जांच कराने के लिए प्रेरित किया। पिछले पांच वर्षों से वह इस संगठन की बोर्ड सदस्य हैं। यह संगठन 2015 में निक जोनस द्वारा सह-स्थापित किया गया था और इसका उद्देश्य कलंक को कम करना तथा लोगों को जरूरी संसाधनों से जोड़ना है।
पहले यह संगठन मुख्य रूप से अमेरिका पर केंद्रित था लेकिन पिछले दिसंबर में प्रियंका के सहयोग से भारत में टाइप 1 डायबिटीज पर एक जागरूकता अभियान शुरू किया गया। उनकी पहल में भारत में जागरूकता अभियान चलाना, स्थानीय एंबेसडरों को जोड़ना और कई क्षेत्रीय भाषाओं में शैक्षिक सामग्री उपलब्ध कराना शामिल है।
उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक अभियान वीडियो साझा किया, जिसे दुनिया भर में करोड़ों लोगों ने देखा। इससे शुरुआती जांच और इलाज के संदेश को व्यापक पहुंच मिली। पिछले सितंबर में ‘बियॉन्ड टाइप 1’ ने अपने नए एंबेसडरों को संयुक्त राष्ट्र महासभा की एक स्वास्थ्य बैठक में शामिल किया, जहां उन्होंने इस बीमारी के साथ जीवन के अनुभव साझा किए।
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