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भारत–ब्रिटेन की बड़ी पहल! साइंस और टेक पार्टनरशिप डैशबोर्ड लॉन्च

यह डैशबोर्ड भारत के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद और ब्रिटेन के नेशनल टेक्नोलॉजी एडवाइजर डेविड वॉरेन स्मिथ ने नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में द्विपक्षीय बैठक के दौरान पेश किया।

 भारत-यूनाइटेड किंगडम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी साझेदारी (आईएन-यूके-एसटीपी) डैशबोर्ड के पायलट संस्करण का शुभारंभ भारत-यूनाइटेड किंगडम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी साझेदारी (आईएन-यूके-एसटीपी) डैशबोर्ड के पायलट संस्करण का शुभारंभ / PIB

भारत और ब्रिटेन ने 4 नवंबर को India-UK Science and Technology Partnership (IN-UK-STP) Dashboard लॉन्च किया। इसका मकसद अनुसंधान और नवाचार में सहयोग को आसान और स्पष्ट बनाना है।

यह डैशबोर्ड भारत के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद और ब्रिटेन के नेशनल टेक्नोलॉजी एडवाइजर डेविड वॉरेन स्मिथ ने नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में द्विपक्षीय बैठक के दौरान पेश किया।

इस डैशबोर्ड को PSA कार्यालय और ब्रिटिश हाई कमीशन ने बनाया है। यह 2018 से अब तक की 143 द्विपक्षीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी परियोजनाओं की जानकारी दिखाता है। इसमें परियोजनाओं के फंड, पार्टनर और एजेंसियों का विवरण है और यह India-UK Science and Innovation Council (SIC) के लक्ष्यों, UN सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) और प्रमुख तकनीकी सहयोग क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है।

बैठक में PSA कार्यालय के साइंटिफिक सेक्रेटरी पर्विंदर मैननी, भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग और ब्रिटेन के DSIT व ब्रिटिश हाई कमीशन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। पर्विंदर मैननी ने इसे साक्ष्य और नीति उपकरण बताया और कहा कि दोनों सरकारों के सघन समन्वय ने इसे संभव बनाया।

अजय कुमार सूद ने कहा कि यह डैशबोर्ड India-UK Technology Security Initiative और द्विपक्षीय व्यापार समझौते जैसी पहलों को पूरा करेगा। यह प्राथमिकताओं को समन्वित करने, अंतराल खोजने और साझेदारी की दिशा समझने में मदद करेगा।

डेविड स्मिथ ने कहा कि डैशबोर्ड India-UK Research and Innovation Corridor (RIC) को विकसित करने में मदद करेगा, जो हाल ही में संयुक्त वैज्ञानिक अवसंरचना और सहयोग बढ़ाने के लिए घोषित किया गया था।

दोनों पक्षों ने यह भी कहा कि डैशबोर्ड में भविष्य में प्रकाशन, पेटेंट, स्टार्टअप साझेदारी और निजी क्षेत्र की भागीदारी जैसी जानकारी भी जोड़ी जाए। इस डैशबोर्ड से नीति निर्माता द्विपक्षीय परियोजनाओं की प्रगति देख पाएंगे, उनके असर का आंकलन कर सकेंगे और भविष्य की अनुसंधान योजनाएं आसानी से बना सकेंगे।

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