अरुणा मिलर / Screengrab from Government, Labor, and Elections Committee Bill Hearing
मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर अरुणा मिलर ने 10 मार्च को एक हाउस समिति के सामने राज्य के संविधान में जेंडर आधारित भाषा को बदलने के समर्थन में गवाही दी।
मैरीलैंड हाउस गवर्नमेंट, लेबर एंड इलेक्शंस कमेटी के सामने बोलते हुए मिलर ने कहा कि हमारे संविधान में अभी भी सार्वजनिक पद संभालने वालों को 'He' कहकर संबोधित किया जाता है। यह भाषा हमारे इतिहास के एक अलग दौर को दर्शाती है।
उन्होंने हाउस बिल 1488 का समर्थन किया। इस विधेयक का उद्देश्य मैरीलैंड के संविधान को आधुनिक बनाना है। इसके तहत जेंडर आधारित शब्दों को जेंडर-न्यूट्रल शब्दों से बदला जाएगा। उन्होंने कहा कि हाउस बिल 1488 केवल हमारे संविधान को आज के मैरीलैंड के अनुरूप बनाता है।
इस प्रस्ताव के तहत संविधान में मौजूद 'he', 'him' और 'men' जैसे शब्दों को बदला जाएगा। इनकी जगह 'person', 'senator', 'delegate' या 'officer' जैसे तटस्थ शब्दों का उपयोग किया जाएगा।
मिलर ने कहा कि फिलहाल मैरीलैंड के सात संवैधानिक पदों में से चार पर महिलाएं कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि जब राज्य का संविधान पहली बार लिखा गया था तब ऐसी स्थिति की कल्पना करना कठिन था।
उन्होंने कहा कि यह हमारे मूल दस्तावेज को इस तरह अपडेट करता है कि वह मैरीलैंड की सेवा करने वाले लोगों की पूरी विविधता को दर्शाए। उन्होंने कहा कि यह सटीकता का सवाल है और सच कहें तो यह सामान्य समझ की बात है।
आपको बता दें कि हाउस बिल 1488 को डेलीगेट डाना जोन्स ने पेश किया है। यह 2025 के विधायी सत्र में पेश किए गए एक समान प्रस्ताव का विस्तार है। यह विधेयक संविधान के कार्यकारी, विधायी और न्यायिक हिस्सों के साथ-साथ डिक्लेरेशन ऑफ राइट्स और स्थानीय सरकारों से जुड़े प्रावधानों की भाषा में संशोधन करेगा।
क्योंकि यह बिल संविधान में संशोधन का प्रस्ताव करता है इसलिए इसे मैरीलैंड जनरल असेंबली के तीन-पांचवें बहुमत की मंजूरी चाहिए होगी। अगर यह पारित हो जाता है तो इसे अगले राज्यव्यापी आम चुनाव में मतदाताओं के सामने मतदान के लिए रखा जाएगा।
मिलर ने जोन्स और मैरीलैंड की एडजुटेंट जनरल मेजर जनरल जेनीन बर्कहेड के साथ इस प्रस्ताव का समर्थन किया। उन्होंने इसे एक तकनीकी आधुनिकीकरण बताया, जिसका कोई वित्तीय प्रभाव नहीं होगा, लेकिन इसका प्रतीकात्मक महत्व है।
अमेरिका के दस अन्य राज्यों ने पहले ही अपने राज्य के संविधान से जेंडर आधारित सर्वनाम हटा दिए हैं या जेंडर-न्यूट्रल भाषा अपनाई है। कई अन्य राज्यों में भी इसी तरह के प्रयासों पर विचार किया गया है।
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