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क्वात्रा ने भारतीय परमाणु ऊर्जा बाजार में अमेरिकी पहल को आमंत्रित किया

राजदूत ने कहा कि शांति अधिनियम भारतीय परमाणु क्षेत्र को निजी और विदेशी निवेश के लिए खोलता है।

अमेरिका में भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा / Embassy of India

अमेरिका में भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने भारत के नए परमाणु ऊर्जा विधेयक को 'भारत के ऊर्जा और रणनीतिक परिदृश्य में एक बड़ी छलांग' बताया और कहा कि यह विधेयक न केवल दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को बेहतर बनाएगा, बल्कि दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच राजनयिक सौहार्द को भी मजबूत करेगा।

द हिल के लिए लिखे एक लेख में क्वात्रा ने टिप्पणी की कि भारत ने 2008 में अमेरिका के साथ हुए नागरिक परमाणु समझौते के साथ परमाणु ऊर्जा को लेकर अपनी झिझक को तोड़ा और फिर भारत की संसद ने सतत परमाणु ऊर्जा दोहन एवं विकास अधिनियम (शांति अधिनियम) पारित किया, जिससे परमाणु ऊर्जा के तीव्र विकास और विस्तार का मार्ग प्रशस्त हुआ।

इस अधिनियम का उद्देश्य 2047 तक भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 गीगावाट तक बढ़ाना है। यह निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देगा, नियमों को सरल बनाएगा और स्वच्छ एवं विश्वसनीय ऊर्जा के लिए उन्नत रिएक्टर प्रौद्योगिकियों पर ध्यान केंद्रित करेगा। अधिनियम में भारतीय परमाणु परियोजनाओं में विदेशी निवेश का भी प्रावधान है।

क्वात्रा के अनुसार, यह अधिनियम भारत-अमेरिका कॉम्पैक्ट (सैन्य साझेदारी, त्वरित वाणिज्य एवं प्रौद्योगिकी के लिए अवसरों को उत्प्रेरित करना) द्वारा निर्मित गति का लाभ उठाता है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की संयुक्त परमाणु परियोजनाओं, स्थानीयकरण, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और उन्नत एवं छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों की तैनाती के प्रति प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।

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