विदेश मंत्री (ईएएम) एस जयशंकर और अमेरिकी युद्ध विभाग के पॉलिसी अंडर सेक्रेटरी एलब्रिज कोल्बी / IANS
विदेश मंत्री (ईएएम) एस जयशंकर और भारत दौरे पर आए अमेरिकी युद्ध विभाग के पॉलिसी अंडर सेक्रेटरी (उप रक्षा मंत्री के समकक्ष) एलब्रिज कोल्बी ने बुधवार को नई दिल्ली में एक बैठक की। जिसमें मौजूदा भू-राजनीतिक हालात पर चर्चा की गई।
बैठक के बाद ईएएम जयशंकर ने एक्स पर पोस्ट किया, " यूएस के अंडर सेक्रेटरी ऑफ वॉर एलब्रिज कोल्बी से मिलकर खुशी हुई। मौजूदा भू राजनीतिक हालात पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ।"
कोल्बी ने मंगलवार को दिल्ली के अनंता सेंटर में दिए अपने भाषण में भारत को इंडो-पैसिफिक में स्थिर शक्ति संतुलन का अनिवार्य और केंद्रीय भागीदार करार दिया था।
एलब्रिज कोल्बी ने साफ कहा कि भारत सिर्फ एक महत्वपूर्ण साझेदार नहीं, बल्कि एशिया के भविष्य को आकार देने वाली अनिवार्य शक्ति है।
कोल्बी ने कहा, 'भारत की भौगोलिक स्थिति, रणनीतिक स्वायत्तता, विशाल सैन्य क्षमता और बढ़ती आर्थिक ताकत उसे एशिया में संतुलन बनाए रखने के लिए अपरिहार्य बनाती है। हम भारत को ताकतवर, आत्मविश्वासी और स्वायत्त शक्ति के रूप में देखते हैं, न कि किसी पर निर्भर देश के रूप में।'
कोल्बी ने आगे कहा कि दोनों देशों के हित एशिया में किसी एक ताकत के प्रभुत्व को रोकने, खुले व्यापार और राष्ट्रीय स्वायत्तता में गहराई से जुड़े हैं।
कोल्बी ने रक्षा सहयोग को और मजबूत करने की बात करते हुए लंबी दूरी की सटीक हथियारों, समुद्री जागरूकता, पनडुब्बी रोधी युद्ध और उन्नत प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का संकल्प जताया।
रक्षा औद्योगिक सहयोग पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत की स्वदेशी रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने का पूरा समर्थन करता है। दोनों देशों के बीच को-प्रोडक्शन और को-डेवलपमेंट की बड़ी संभावनाएं हैं।
उन्होंने कहा कि भारत को सिर्फ एक अहम साझेदार के तौर पर ही अमेरिका नहीं देखता, बल्कि एशिया में लंबे समय तक अच्छा पावर बैलेंस सुनिश्चित करने वाले एक जरूरी साझेदार के तौर पर देखता है।
कोल्बी ने कहा कि अमेरिका की 'फ्लेक्सिबल रियलिज्म' और 'अमेरिका फर्स्ट' नीति भारत की 'भारत फर्स्ट' और 'इंडिया वे' से गहराई से मेल खाती है। दोनों देश यथार्थवादी, राष्ट्रीय हित आधारित और दृढ़ निश्चयी विदेश नीति में विश्वास रखते हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच कोल्बी भारत के दौरे पर हैं।
कोल्बी ने साफ स्वीकार किया कि दोनों देश हर मुद्दे पर सहमत नहीं होंगे, लेकिन रणनीतिक हितों के आधार पर गहरे सहयोग की गुंजाइश है। उन्होंने कहा, 'हमारी साझेदारी पुरानी औपचारिकताओं पर नहीं, बल्कि ठोस और टिकाऊ रणनीतिक हितों पर टिकी है।'
अमेरिकी युद्ध विभाग ने कोल्बी के दौरे की घोषणा करते हुए बताया कि फरवरी, 2025 में पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच रक्षा संबंधों को लेकर जो सहमति बनी थी, उसको लेकर ठोस नीति बनाने पर बात करने के लिए कोल्बी नई दिल्ली आए हैं।
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