विदेश मंत्रालय ने भारत-स्वीडन शिखर सम्मेलन और 'रणनीतिक साझेदारी की स्थापना' पर संयुक्त बयान जारी किया। / PMO YouTube)
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वीडन यात्रा के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक संयुक्त बयान जारी किया है। मंत्रालय ने बताया कि भारत और स्वीडन के बीच लंबे समय से चली आ रही दोस्ती, द्विपक्षीय सहयोग के व्यापक दायरे और रणनीतिक हितों के मेल को स्वीकार करते हुए दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने द्विपक्षीय संबंधों को 'रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक ले जाने पर सहमति व्यक्त की है।
विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा कि स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन के निमंत्रण पर पीएम नरेंद्र मोदी ने रविवार को गुटेनबर्ग का आधिकारिक दौरा किया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने 27 जनवरी को नई दिल्ली में हुए ऐतिहासिक भारत-ईयू शिखर सम्मेलन, 'टुवर्ड्स 2030: एक संयुक्त भारत-यूरोपीय संघ व्यापक रणनीतिक एजेंडा', भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते के समापन और मोबिलिटी पर व्यापक सहयोग ढांचे के महत्व पर जोर दिया। मंत्रालय के बयान में आगे कहा गया कि प्रधानमंत्रियों ने भारत-ईयू संबंधों को और गहरा करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी चार स्तंभों पर आधारित है, जिनमें पहला- स्थिरता और सुरक्षा के लिए रणनीतिक संवाद, दूसरा- आर्थिक साझेदारी, तीसरा- उभरती प्रौद्योगिकियां और विश्वसनीय कनेक्टिविटी और चौथा- 'कल को मिलकर संवारना' (लोग, ग्रह और लचीलापन) शामिल है।
बयान में कहा गया कि दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी के कार्यान्वयन के लिए एक 'उन्नत संयुक्त कार्य योजना 2026–2030' को मंजूरी दी है। दोनों देशों के नेताओं ने राजनीतिक, कूटनीतिक और रक्षा स्तरों पर संवाद को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की, जिसमें दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों और उनके संबंधित कार्यालयों के बीच आदान-प्रदान भी शामिल है।
इसके अलावा, प्रधानमंत्रियों ने आर्थिक सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा के महत्व का जिक्र किया। साथ ही, पांच वर्षों के भीतर द्विपक्षीय आर्थिक आदान-प्रदान (व्यापार और निवेश) को दोगुना करने के साझा उद्देश्य की घोषणा की, जिसमें 'मेक इन इंडिया' और 'मेड विद स्वीडन' पहलों के माध्यम से किए जाने वाले प्रयास भी शामिल हैं।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों नेताओं ने भारत-स्वीडन व्यापारिक नेताओं की बैठक (आईएसबीएलआरटी) की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया। उन्होंने इस बात पर सहमति जताई कि 2027 में भारत में द्विपक्षीय 'भारत-स्वीडन: एक साथ अधिक मजबूत- टुवर्ड्स 2047' शिखर सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।
इस दौरान, स्वीडन के प्रधानमंत्री क्रिस्टर्सन ने एआई इम्पैक्ट समिट की सफलता पर भारत को बधाई दी। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने स्वीडन की उप-प्रधानमंत्री एब्बा बुश की भागीदारी और उनके साथ स्वीडिश एआई इकोसिस्टम से आए एक बड़े प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति की सराहना की।
विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया, "दोनों प्रधानमंत्रियों ने टेक्नोलॉजी और भरोसेमंद कनेक्टिविटी को लेकर प्राथमिकताओं पर जोर दिया, साथ ही डिजिटलीकरण की अहम भूमिका को भी रेखांकित किया। उन्होंने इस क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने पर सहमति जताई, जिसमें 'स्वीडन-भारत टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कॉरिडोर' (एसआईटीएसी) के जरिए किया जाने वाला सहयोग भी शामिल है।"
दोनों प्रधानमंत्रियों ने इस बात पर भी सहमति जताई कि स्वीडन और भारत एक उन्नत 'ज्वाइंट इनोवेशन पार्टनरशिप 2.0' शुरू करेंगे और एक 'भारत-स्वीडन संयुक्त विज्ञान और प्रौद्योगिकी केंद्र' की स्थापना करेंगे।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों प्रधानमंत्रियों ने अंतरिक्ष और भू-स्थानिक टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सहयोग को और बढ़ाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने भारत को एक अग्रणी अंतरिक्ष राष्ट्र के तौर पर और स्वीडन के 'एसरेंज स्पेस सेंटर' की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया। इसके अलावा, उन्होंने 'भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन' (इसरो) और 'स्वीडिश इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस फिजिक्स' के बीच 'भारतीय शुक्र ऑर्बिटर मिशन' को लेकर हो रहे सहयोग का भी स्वागत किया।
दोनों नेताओं ने 'लीडरशिप ग्रुप फॉर इंडस्ट्री ट्रांजिशन' (एलईएडी-आईटी) के विस्तार और बढ़ते जुड़ाव का स्वागत किया। साथ ही, उन्होंने भारी उद्योगों के बदलाव की गति तेज करने के लिए वैश्विक आंदोलन को आगे बढ़ाने का फैसला किया। प्रधानमंत्रियों ने एलईएडी-आईटी के एक नए चार-वर्षीय चरण (एलईएडी-आईटी 3.0) की घोषणा 'सीओपी-31' में किए जाने का आह्वान किया।
प्रधानमंत्रियों ने इसके अलावा द्विपक्षीय 'स्वीडन-भारत उद्योग बदलाव साझेदारी' (आईटीपी) के महत्व को भी स्वीकार किया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने खनन और खनिज प्रसंस्करण तकनीकों में सहयोग को बढ़ावा दिया, ताकि कम-ग्रेड और जटिल महत्वपूर्ण खनिज भंडारों से कुशल निष्कर्षण को सुगम बनाया जा सके।
विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया, "घरेलू मूल्य संवर्धन को बढ़ाने के लिए रिफाइनिंग और डाउनस्ट्रीम प्रसंस्करण क्षमताओं के सह-विकास को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा सकते हैं। ऐसी पहलों से आपूर्ति श्रृंखलाओं के मजबूत होने की उम्मीद है।"
प्रधानमंत्रियों ने कनेक्टिविटी के महत्व पर जोर दिया और प्रतिभाओं को आकर्षित करने व लोगों के बीच आपसी आदान-प्रदान को सक्रिय रूप से बढ़ावा देने पर सहमति जताई। इसमें छात्रों और शोधकर्ताओं की आवाजाही (स्वीडन में अध्ययन) और अत्यधिक कुशल श्रमिकों की आवाजाही (स्वीडन में काम) शामिल है।
इसके अलावा, प्रधानमंत्रियों ने स्वीडन और भारत के बीच सीधी और नियमित हवाई सेवाओं की संभावनाओं पर विचार किया। दोनों नेताओं ने आतंकवाद की स्पष्ट और कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने हाल ही में हुए आतंकवादी हमलों, जिनमें 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ आतंकवादी हमला भी शामिल है, की कड़े शब्दों में निंदा की।
नेताओं ने आतंकवादी बुनियादी ढांचे और सुरक्षित पनाहगाहों को नष्ट करने का आह्वान किया। वहीं, आतंकवाद से व्यापक तथा निरंतर तरीके से निपटने के लिए निर्णायक और समन्वित अंतरराष्ट्रीय प्रयासों की मांग की।
मंत्रालय के बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने आतंकवाद के वित्तपोषण के चैनलों को बाधित करने के लिए सक्रिय उपाय जारी रखने की अपनी मजबूत प्रतिबद्धता भी दोहराई, जिसमें संयुक्त राष्ट्र और एफएटीएफ जैसे मंचों पर किए जाने वाले उपाय भी शामिल हैं।
इस दौरान, स्वीडन के प्रधानमंत्री क्रिस्टर्सन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए स्वीडन के समर्थन को दोहराया। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने अपने स्वीडन के प्रधानमंत्री क्रिस्टर्सन और स्वीडन की जनता को उनके गर्मजोशी भरे आतिथ्य के लिए धन्यवाद दिया। पीएम मोदी ने क्रिस्टर्सन को भारत आने का भी निमंत्रण दिया।
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