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विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में अहम भूमिका निभाएंगे भारतीय प्रवासी: इंडियास्पोरा रिपोर्ट

इंडियास्पोरा के कार्यकारी निदेशक और रिपोर्ट के सह-लेखक संजीव जोशीपुरा ने बताया कि यह रिपोर्ट बताती है कि अब तक भारतीय प्रवासी समुदाय ने क्या योगदान दिया है और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में वे आगे क्या भूमिका निभा सकते हैं।

Indiaspora event. / Shinjini Ghosh

इंडियास्पोरा फोरम का सैकेंड एडिशन 23 मार्च को भारत के बेंगलुरु में शुरू हुआ जहां 'India and its Diaspora: Partners in Progress, Supporting India’s Journey to 2047' शीर्षक से एक प्रभाव रिपोर्ट जारी की गई। यह फोरम द्वारा जारी की गई तीसरी ऐसी प्रभाव रिपोर्ट है जो भारत और वैश्विक भारतीय प्रवासी समुदाय के संबंधों और भविष्य की संभावनाओं पर केंद्रित है।

इंडियास्पोरा के कार्यकारी निदेशक और रिपोर्ट के सह-लेखक संजीव जोशीपुरा ने बताया कि यह रिपोर्ट बताती है कि अब तक भारतीय प्रवासी समुदाय ने क्या योगदान दिया है और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में वे आगे क्या भूमिका निभा सकते हैं।

उन्होंने बताया कि हम प्रवासी समुदाय के योगदान का जश्न मनाना चाहते हैं लेकिन साथ ही यह भी देखना चाहते हैं कि वे 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में क्या नई भूमिका निभा सकते हैं। भारत और प्रवासी भारतीय दोनों ही इस समय एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़े हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक सर्वे में शामिल लोगों की तीन प्रमुख आकांक्षाएं थीं। पहला भारत को एक आर्थिक महाशक्ति के रूप में देखना, दूसरा, वैश्विक स्तर पर मजबूत भू-राजनीतिक शक्ति बनते देखना और तीसरा, AI व तकनीक में अग्रणी भूमिका निभाना। इस रिपोर्ट के लिए वैश्विक भारतीय प्रवासी समुदाय के 200 से अधिक लोगों से सर्वे किया गया। इनमें लगभग 50 गैर-सरकारी संगठनों से इनपुट लिया गया और 12 देशों के 40 विशेषज्ञों का साक्षात्कार भी किया गया।

रिपोर्ट की सह-लेखक निरंजना राजागोपाल ने कहा कि एक दिलचस्प तथ्य यह सामने आया कि 60 प्रतिशत प्रवासी अपने मूल से जुड़े रहना भारत से जुड़ाव का सबसे महत्वपूर्ण कारण मानते हैं। रिपोर्ट में भारत और प्रवासी समुदाय दोनों के लिए सुझाव भी दिए गए हैं ताकि 2047 के लक्ष्यों को हासिल किया जा सके। इसमें प्रवासियों के लिए OCI कार्ड को और मजबूत बनाने, संभावित दोहरी नागरिकता पर विचार करने और नई पीढ़ियों को भारत से जोड़ने के लिए अधिक अवसर देने की सिफारिश की गई है।

इसके अलावा व्यापार, परोपकार, शिक्षा और सरकार से जुड़े क्षेत्रों में प्रवासियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए बाधाओं को कम करने की भी बात कही गई है। प्रवासी समुदाय के लिए सुझावों में भारत से पीढ़ीगत संबंध मजबूत करना, स्थानीय स्तर पर मिलकर काम करना, अपने-अपने देशों में नीति निर्माण को प्रभावित करना और प्रतिभा, पूंजी व अवसरों के बीच सेतु बनाना शामिल है।

जोशीपुरा ने कहा कि आज भारतीय प्रवासी दुनिया का सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय है। दुनिया के 200 से अधिक देशों में करीब 3.5 करोड़ भारतीय मूल के लोग रहते हैं। यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब भारत 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है और इसमें प्रवासी भारतीयों की भूमिका को एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देखा जा रहा है।

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