जन्मसिद्ध नागरिकता आदेश / NPR
अमेरिका में जन्मसिद्ध नागरिकता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई से पहले भारतीय मूल के नेताओं और संगठनों ने इसका समर्थन किया है। यह मामला पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस आदेश से जुड़ा है जिसमें जन्म से मिलने वाली नागरिकता को सीमित करने की कोशिश की गई है।
Today, the Supreme Court will hear arguments on President Trump’s executive order seeking to end birthright citizenship, denying it for those born in the US to parents in the country undocumented or temporarily.
— Rep. Ro Khanna (@RepRoKhanna) April 1, 2026
कांग्रेस सदस्य रो खन्ना ने इस पर कहा है कि यह मुद्दा उनके लिए व्यक्तिगत रूप से बहुत अहम है। उन्होंने बताया कि उनका जन्म 1976 में फिलाडेल्फिया में हुआ था और उनके माता-पिता प्रवासी थे। उन्होंने कहा भले ही मेरे माता-पिता इस आदेश से सीधे प्रभावित नहीं होते लेकिन यह मेरे लिए बहुत निजी मामला है। मेरे माता-पिता अक्सर कहते थे कि अमेरिका में जन्म लेना किसी लॉटरी जीतने जैसा है।
रो खन्ना ने 1898 के एक सुप्रीम कोर्ट फैसले का भी जिक्र किया। उस फैसले में कहा गया था कि अमेरिका में जन्म लेने वाला बच्चा नागरिक होगा। भले ही उसके माता-पिता प्रवासी हों। खन्ना ने ये भी कहा कि उस समय चीन विरोधी माहौल था और अब कुछ लोग फिर से वैसी ही सोच लाना चाहते हैं।
Today, the Supreme Court is hearing oral arguments on Trump's executive order to eliminate birthright citizenship.
— Rep. Pramila Jayapal (@RepJayapal) April 1, 2026
The president does not get to decide who is a citizen on a whim — the Constitution does.
It's simple: if you’re born in the United States, you’re a citizen.
ऐसे ही कांग्रेस सदस्य प्रमिला जयपाल ने कहा कि राष्ट्रपति यह तय नहीं कर सकते कि कौन नागरिक होगा। यह संविधान तय करता है। अगर कोई अमेरिका में जन्म लेता है, तो वह नागरिक है।
As an immigrant myself, today's arguments on birthright citizenship are deeply personal to me. The 14th Amendment is clear: the children of immigrants are guaranteed US citizenship. Despite President Trump's wishes, he cannot rewrite the Constitution.
— Congressman Shri Thanedar (@RepShriThanedar) April 1, 2026
कांग्रेस सदस्य श्री थानेदार ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा मैं खुद एक प्रवासी हूं। यह मुद्दा मेरे लिए भी व्यक्तिगत है। संविधान साफ कहता है कि प्रवासियों के बच्चों को नागरिकता मिलेगी। कोई भी राष्ट्रपति संविधान नहीं बदल सकता।
The Supreme Court hears oral arguments today in Trump v. Barbara.
— Indian American Impact (@IA_Impact) April 1, 2026
This executive order is a direct assault on the Constitution and birthright citizenship, threatening thousands of South Asian and immigrant families.
We stand firm—we belong here and we will never stop fighting. pic.twitter.com/Lsuo0v4BYy
वहीं भारतीय मूल के संगठन इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट ने भी इस आदेश की आलोचना की। संगठन ने इसे संविधान और जन्मसिद्ध नागरिकता पर सीधा हमला बताया। संगठन के प्रमुख चिंतन पटेल ने कहा कि यह कदम बहुत खतरनाक है। उन्होंने कहा कि यह संविधान में बदलाव करने की कोशिश है और इससे प्रवासी परिवारों पर बड़ा असर पड़ेगा।
पटेल ने बताया कि कई भारतीय परिवार लंबे समय से वीजा और ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हैं। अगर यह नियम लागू होता है, तो उनके बच्चों की स्थिति अनिश्चित हो सकती है। हम उन सभी संगठनों के साथ खड़े हैं जो प्रवासियों के अधिकारों की रक्षा कर रहे हैं। पटेल ने यह भी कहा कि हम हमेशा से यहां के हैं और रहेंगे।
आपको बता दें कि यह मामला ट्रंप बनाम बारबरा के नाम से चल रहा है। इसमें सरकार जन्मसिद्ध नागरिकता के दायरे को सीमित करना चाहती है। यह सुनवाई इस बात पर केंद्रित है कि क्या अमेरिका में जन्मे उन बच्चों को नागरिकता मिलेगी या नहीं जिनके माता-पिता अवैध रूप से या अस्थायी तौर पर वहां रह रहे हैं। इस मामले का फैसला इस साल के अंत तक आने की संभावना है।
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