ADVERTISEMENT

ADVERTISEMENT

कनाडा में भारतीयों पर बढ़ती रंगदारी के बीच भारतीय-कनाडाई सांसद का बिल खारिज

यह बिल ऐसे समय में आया जब कनाडा में भारतीय कारोबारियों को निशाना बनाकर उगाही के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है।

भारतीय मूल के कंजरवेटिव सांसद अर्पण खन्ना / Team Arpan via Facebook

कनाडा के हाउस ऑफ कॉमन्स में Jail Not Bail Act खारिज होने के बाद भारतीय मूल के कंजरवेटिव सांसद अर्पण खन्ना ने कहा है कि वह अपराध पीड़ितों के लिए आवाज उठाना जारी रखेंगे। 25 मार्च को खारिज इस बिल (Bill C-242) का मकसद कनाडा के क्रिमिनल कानून में बदलाव करना था। इसमें जमानत के फैसलों में सख्ती लाने और प्रिसिंपल ऑफ रिस्ट्रेंट को हटाने का प्रस्ताव था।

यह बिल ऐसे समय में आया जब कनाडा में भारतीय कारोबारियों को निशाना बनाकर उगाही के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। पिछले दशक में ऐसे मामलों में 300 प्रतिशत से ज्यादा वृद्धि दर्ज देखने को मिली है जिनका संबंध अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध से बताया जा रहा है। इस बिल में कुछ हिंसक अपराधों के लिए reverse-onus नियम लागू करने का प्रस्ताव था जिसमें आरोपी को खुद साबित करना होता कि उसे जमानत क्यों दी जाए।

इसके अलावा बार-बार अपराध करने वालों पर सख्ती, जमानत देने वाले नियमों में बदलाव और गैर-नागरिक आरोपियों के लिए पासपोर्ट जमा कराने जैसे प्रावधान भी शामिल थे। वोटिंग के बाद खन्ना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो शेयर करते हुए फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि अभी कुछ समय पहले ही लिबरल्स ने मेरे ‘Jail Not Bail Bill’ को खारिज कर दिया। यह एक ठोस योजना थी जिसमें क्रिमिनल कोड में कई बदलाव शामिल थे ताकि खराब बेल सिस्टम को सुधारा जा सके और पीड़ितों को प्राथमिकता दी जा सके।

खन्ना ने कहा कि इस बिल को पुलिस, पीड़ितों और आम लोगों का समर्थन मिला था। उन्होंने कहा कि यह निराशाजनक है लेकिन यह अंत नहीं है। यह लड़ाई सिर्फ एक वोट की नहीं है। यह उन लोगों के लिए है जो अपने घर और समाज में सुरक्षित महसूस करना चाहते हैं। पीड़ितों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हिम्मत मत हारिए। आपकी आवाज मायने रखती है। आपकी कहानी मायने रखती है। हमारी टीम हर दिन आपके लिए लड़ रही है।

इस बिल के खारिज होने से एक दिन पहले खन्ना और उनके सहयोगी सांसद लेरी ब्रोक ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कॉर्नी को पत्र लिखकर इस कानून का समर्थन करने की मांग की थी। इस पत्र में उन्होंने लिबरल सरकार की बेल नीति की आलोचना की और बार-बार हिंसक अपराध करने वालों के खिलाफ सख्त नियमों की मांग की।

खन्ना ने लिखा कि हिंसक अपराध बढ़ रहे हैं। उगाही के मामले बढ़ रहे हैं। यौन अपराध और हत्याएं भी बढ़ रही हैं। ये सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि परिवारों के टूटने और समाज के दुख की कहानी हैं। उन्होंने कहा कि कनाडा को ऐसा बेल सिस्टम चाहिए जो पीड़ितों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे। उन्होंने कहा कि खतरनाक और बार-बार अपराध करने वाले लोगों को बार-बार समाज में वापस नहीं छोड़ा जाना चाहिए।

हाल ही में खालसा वॉक्स की एक रिपोर्ट में वैंकूवर में पंजाबी बिल्डर्स के खिलाफ बढ़ती उगाही का जिक्र किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक जो घटनाएं पहले सरे (Surrey) तक सीमित थीं, अब वे बड़े स्तर पर फैल चुकी हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि वैंकूवर में बिल्डर्स अपने प्रोजेक्ट के बोर्ड हटा रहे हैं, वेबसाइट से नंबर और पते हटा रहे हैं, प्रोजेक्ट में देरी कर रहे हैं और डर में जी रहे हैं कि उनकी सफलता ही उन्हें निशाना बना रही है। रिपोर्ट में गोलीबारी, आगजनी और हमलों जैसे खतरों का भी जिक्र किया गया है।

Comments

Related