सांकेतिक तस्वीर / IANS
भारतीय स्टार्टअप किडबिया (Kidbea) के सह-संस्थापक स्वप्निल श्रीवास्तव को अमेरिकी वीजा देने से इनकार कर दिया गया। वीजा अस्वीकार करने का कारण भारत से पर्याप्त जुड़ाव नहीं होना बताया गया।
श्रीवास्तव ने इस अनुभव को सोशल मीडिया पर साझा किया और कहा कि उन्हें हैरानी हुई कि उनकी उद्यमी उपलब्धियों को भारत लौटने की मंशा के पर्याप्त प्रमाण के रूप में नहीं माना गया।
उन्होंने लिखा कि आज मेरा अमेरिकी वीजा आवेदन खारिज कर दिया गया। कारण बताया गया 'होम कंट्री से पर्याप्त जुड़ाव नहीं'।
उन्होंने कहा कि उन्होंने शून्य से एक सीरीज-ए स्टार्टअप खड़ा किया है। उनकी कंपनी में 100 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं, उन्हें प्रमुख निवेशकों का समर्थन प्राप्त है और उनका ब्रांड भारत के लाखों परिवारों तक पहुंचता है।
उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि शायद यह भी पर्याप्त जुड़ाव नहीं है।
श्रीवास्तव ने कहा कि वह भविष्य में दोबारा आवेदन करेंगे और उन लोगों से सलाह भी मांगी जिन्हें पहली बार वीजा अस्वीकृत होने के बाद बाद में वीजा मिल गया था।
किडबिया की स्थापना वर्ष 2021 में हुई थी। यह एक डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर बच्चों के कपड़ों का ब्रांड है, जो बांस (बैंबू) से बने उत्पादों पर केंद्रित है। कंपनी को कई वेंचर कैपिटल फर्मों और निवेशकों से फंडिंग मिली है और यह भारत के उभरते उपभोक्ता स्टार्टअप्स में गिनी जाती है।
श्रीवास्तव की पोस्ट पर उद्यमियों, पेशेवरों और नियमित अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की बड़ी संख्या में प्रतिक्रियाएं आईं। कई लोगों ने अमेरिकी वीजा आवेदन से जुड़े अपने समान अनुभव साझा किए।
कई उपयोगकर्ताओं ने कहा कि किसी व्यवसाय का मालिक होना या स्टार्टअप का नेतृत्व करना, अमेरिकी वीजा अधिकारियों की नजर में अपने आप यह साबित नहीं करता कि आवेदक यात्रा के बाद अपने देश लौट आएगा।
कुछ लोगों ने यह भी कहा कि भारत में संपत्ति का स्वामित्व, परिवार का भारत में रहना और पहले की अंतरराष्ट्रीय यात्रा का रिकॉर्ड जैसे कारक वीजा मूल्यांकन के दौरान अधिक महत्व रखते हैं।
आव्रजन विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिकी पर्यटक वीजा के लिए आवेदन करने वाले लोगों को वाणिज्य दूतावास के अधिकारियों को यह संतुष्ट करना होता है कि वे यात्रा पूरी होने के बाद अपने देश लौट जाएंगे।
यह मूल्यांकन आवेदक की पूरी प्रोफाइल के आधार पर किया जाता है, जिसमें उसके व्यक्तिगत, वित्तीय और सामाजिक संबंध शामिल होते हैं।
कुछ पर्यवेक्षकों का कहना है कि यह मामला दिखाता है कि सफल उद्यमियों को भी वीजा प्रक्रिया में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि केवल पेशेवर उपलब्धियां वीजा पात्रता साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं मानी जातीं।
इस घटना के बाद भारतीय स्टार्टअप जगत में अमेरिकी वीजा निर्णयों की व्यक्तिपरक प्रकृति को लेकर बहस फिर से तेज हो गई है। कई संस्थापकों ने कहा कि पर्यटन, नेटवर्किंग या उद्योग से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए अमेरिका जाने वाले व्यापारिक नेताओं को भी वीजा प्रक्रिया में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
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