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भारत के चुनावों में NRIs की भागीदारी बढ़ाने की याचिका सुप्रीम कोर्ट से खारिज, ये रही वजह

एनआरआई वोटर्स को अभी भारत में वोट डालने के लिए व्यक्तिगत रूप से मतदान केंद्रों पर उपस्थित होना आवश्यक होता है।

 प्रवासियों की चुनावी प्रक्रिया में भागीदारी बढ़ाने की लंबे समय से  मांग हो रही है। प्रवासियों की चुनावी प्रक्रिया में भागीदारी बढ़ाने की लंबे समय से मांग हो रही है। / Photo sci.gov.in

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने देश की चुनावी प्रक्रिया में भारतीय प्रवासियों की भागीदारी बढ़ाने की मांग वाली जनहित याचिका (पीआईएल) को खारिज कर दिया है। 

ये याचिका साव्या सचिन कृष्णन निगम द्वारा दायर की गई थी। इसमें लाखों अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) के सामने वोट डालने में आने वाली चुनौतियों को रेखांकित किया गया था।  इस पर जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्जल भुइयां की दो जजों की कोर्ट में सुनवाई हुई।

नियमानुसार एनआरआई वोटर्स को अभी भारत में वोट डालने के लिए व्यक्तिगत रूप से मतदान केंद्रों पर उपस्थित होना आवश्यक होता है। मांग की गई थी कि भारतीय डायस्पोरा के सदस्यों को पोस्टल बैलट या दूतावास में मतदान जैसी किसी प्रक्रिया के तहत वोट डालने का अधिकार दिया जाए। 

अदालत ने याचिकाकर्ता को खुद बहस करने की छूट दी थी। याचिकाकर्ता ने एनआरआई की देश की मतदान प्रक्रिया में अधिक राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए दूरस्थ मतदान प्रणाली अपनाने के लिए कई तर्क दिए। भारतीय चुनाव आयोग की तरफ से कहा गया कि इस मामले में व्यापक विचार-विमर्श और नीतिगत समायोजन की आवश्यकता है।

शुरुआती दलीलों के बाद याचिकाकर्ता ने अदालत के सामने याचिका वापस लेने की इच्छा जताई। उनका कहना था कि वह अधिक उपयुक्त मंच पर अर्जी देने पर विचार करेंगे। इसके बाद अदालत ने याचिका को वापस लिया हुआ मानकर मामले को खारिज कर दिया।

करीब 1.35 करोड़ भारतीय प्रवासियों की चुनावी प्रक्रिया में भागीदारी बढ़ाने का सिस्टम बनाने की लंबे समय से मांग हो रही है। विदेश में बैठकर मतदान करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक पोस्टल बैलेट जैसे उपायों पर चर्चा भी होती रही है, लेकिन सहमति नहीं बन पाई है।
 

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