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भारतीय मूल के वकील का फर्जी दावा, ब्रिटेन के न्यायाधिकरण ने किया निलंबित

एक स्वतंत्र न्यायाधिकरण ने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के झूठे दावे के लिए अनुराग मोहिन्द्रू के.सी. को व्यावसायिक कदाचार का दोषी पाया।

सांकेतिक तस्वीर / Pexels

भारतीय मूल के बैरिस्टर अनुराग मोहिन्द्रू केसी को एक स्वतंत्र अनुशासनात्मक न्यायाधिकरण द्वारा 2012 के चैंबर्स आवेदन में बेईमानी से काम करने के बाद निष्कासित कर दिया गया है। 12 सितंबर को घोषित यह फैसला 8 सितंबर को शुरू हुई कार्यवाही के बाद आया है। मोहिन्द्रू को 2004 में इंग्लैंड और वेल्स बार में बुलाया गया था। 

न्यायाधिकरण ने निर्धारित किया कि मोहिन्द्रू ने अपने बायोडाटा में गलत जानकारी दी थी। सीवी में उन्होंने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से बायोमेडिकल साइंस और मेडिसिन की पढ़ाई करने की बात लिखी थी। बाद में यह दावा झूठा पाया गया। पैनल ने इस आचरण को बार के सदस्यों के लिए आवश्यक मानकों का गंभीर उल्लंघन बताया।

बार स्टैंडर्ड्स बोर्ड (BSB) ने एक बयान में कहा कि श्री एम को बेईमान पाते हुए पैनल ने फैसला किया कि उन्हें निष्कासित करने का आदेश देना उचित होगा। अपील लंबित रहने तक उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

BSB के एक प्रवक्ता ने कहा कि जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए यह प्रतिबंध जरूरी था। प्रवक्ता ने कहा कि जनता और पेशेवर लोगों को उम्मीद करनी चाहिए कि बैरिस्टर चैंबर्स में पदों के लिए आवेदन करते समय ईमानदार होंगे।

प्रवक्ता ने कहा कि इस तरह की बेईमानी जनता का बैरिस्टरों और पूरे पेशे में विश्वास और भरोसे को कमजोर करती है। श्री मोहिन्द्रू को अयोग्य ठहराने का न्यायाधिकरण का फैसला इस कदाचार की गंभीरता और बार की अखंडता बनाए रखने के महत्व को दर्शाता है।

न्यायाधिकरण के फैसले के बाद, 50 वर्षीय मोहिन्द्रू ने एसेक्स काउंटी क्रिकेट क्लब के बोर्ड सदस्य पद से भी इस्तीफ़ा दे दिया। एक बयान में क्लब ने पुष्टि की: उन्होंने रविवार को एक बैठक में बोर्ड को अपने फैसले से अवगत कराया।

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