जय गोत्रा / governorgotra.com
रोड आइलैंड के गवर्नर पद के लिए चुनाव लड़ने वाले पहले भारतीय-अमेरिकी डेमोक्रेट, जय गोत्रा का मानना है कि भारतीय-अमेरिकियों की जिम्मेदारी सिर्फ चुनाव जीतने तक ही सीमित नहीं है।
किशोरावस्था में अमेरिका आए आप्रवासियों के बेटे गोत्रा का कहना है कि उनकी उम्मीदवारी का मकसद सिर्फ राज्य का मुख्य कार्यकारी (गवर्नर) बनना नहीं है। यह ज्यादा से ज्यादा भारतीय-अमेरिकियों को जन-सेवा को एक जिम्मेदारी के तौर पर देखने और देश के भविष्य को आकार देने में सक्रिय रूप से शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करने की एक कोशिश है।
'न्यू इंडिया अब्रॉड' के साथ एक इंटरव्यू में गोत्रा ने कहा कि हमारे पास जो एक चीज है, वह है समुदाय। उन्होंने तर्क दिया कि देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती वैचारिक मतभेद नहीं, बल्कि उन अमेरिकियों के बीच बढ़ती खाई है जो अब एक-दूसरे से जुड़ते नहीं हैं।
समुदाय का निर्माण
गोत्रा के अनुसार, भारतीय-अमेरिकियों को अलग-अलग समुदायों को एक साथ लाने में मदद करनी चाहिए, न कि पार्टी या संस्कृति के आधार पर बने अलग-अलग दायरों में सिमट जाना चाहिए। अगर हम दूसरे समुदायों को एक साथ लाने के लिए भारतीय समुदाय पर निर्भर नहीं रहते हैं, तो भारतीय होने के नाते हमने अपना मकसद पूरा नहीं किया।
उन्होंने कहा कि भारतीय होने के नाते हमें इस देश को अपना मानना चाहिए। उन्होंने अमेरिका को अलग-अलग संस्कृतियों का संगम (मेल्टिंग पॉट) बताया, जहां हर समुदाय के लिए जगह है। साथ ही, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नई पीढ़ियां जब देश के भविष्य को आकार दें, तो उन्हें देश की मौजूदा विरासत का सम्मान भी करना चाहिए।
गोत्रा का मानना है कि भारतीय-अमेरिकी समुदाय राजनीतिक और सांस्कृतिक दूरियों को पाटने की अनूठी स्थिति में है, क्योंकि यह समुदाय परिवार, शिक्षा और जन-सेवा पर जोर देता है।
वे कहते हैं कि हमारा मकसद हमेशा समुदाय, विकास और भलाई को बढ़ावा देना रहा है। मैं चाहता हूं कि भारतीय इसमें आगे आएं... हमें ऐसे समझदार और होशियार लोगों की जरूरत है जो राज्य के भले को ध्यान में रखकर समझदारी भरे और अच्छे फैसले लें।
GRIT (ग्रिट) प्लैटफॉर्म
यही संदेश उनके गवर्नर पद के अभियान का आधार बना है। उनका कहना है कि यह अभियान इस सोच पर टिका है कि नेतृत्व का काम लोगों को बांटना नहीं, बल्कि उन्हें एकजुट करना होना चाहिए।
गोत्रा ने कहा कि राजनीति लोगों को बांटने वाली होती है। यह डर फैलाने और बंटवारे की भावना पर टिकी होती है। उन्होंने तर्क दिया कि राजनीतिक पार्टियों ने अमेरिकियों को एक-दूसरे को पड़ोसी के तौर पर देखने के बजाय विरोधी के तौर पर देखने के लिए ज्यादा प्रोत्साहित किया है, जबकि उन्हें मिलकर काम करने के रास्ते तलाशने चाहिए।
इसके बजाय, वह पार्टी-आधारित राजनीति की जगह 'समुदाय-संचालित शासन' लाना चाहते हैं। उनके अभियान का प्लैटफॉर्म, GRIT – 'ग्रो रोड आइलैंड टुगेदर' (रोड आइलैंड का मिलकर विकास करें) – उनके बिजनेस बनाने के अनुभव पर आधारित है। उनका कहना है कि बिजनेस में सफलता अकेले नेतृत्व से नहीं, बल्कि टीमों को सशक्त बनाने से मिलती है। गोत्रा ने कहा कि एक अच्छा लीडर पूरी तरह तैयार प्लान के साथ नहीं आता। एक अच्छा लीडर एक विजन के साथ आता है।
इनोवेशन इकॉनमी
यही सोच उनके आर्थिक एजेंडे में भी दिखती है, जिसमें नौकरशाही के बजाय एंटरप्रेन्योरशिप (उद्यमिता) पर जोर दिया गया है। गोत्रा का तर्क है कि रोड आइलैंड में कारोबार करना आसान बनाया जाना चाहिए। इसके लिए गैर-जरूरी नियमों को कम करना, परमिट लेने की प्रक्रिया को आसान बनाना और सरकार को सिर्फ नियम बनाने वाली संस्था के बजाय एंटरप्रेन्योर्स के पार्टनर के तौर पर बदलना जरूरी है।
उनके प्रस्तावों में यह भी शामिल है कि सरकारी एजेंसियों को 90 दिनों के अंदर परमिट आवेदनों को मंजूरी देनी होगी या उन्हें अस्वीकार करना होगा; अगर इस समय में कोई कार्रवाई नहीं होती है, तो आवेदन अपने-आप मंजर हो जाएंगे। वह बिजनेस रिसोर्स सेंटर बनाने की भी वकालत करते हैं, जो एंटरप्रेन्योर्स को नियमों का पालन करने में मदद करें, न कि गलती होने पर उन्हें सजा दें।
ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भरता उनके कैंपेन का एक और अहम हिस्सा है। गोत्रा का मानना है कि रोड आइलैंड को सोलर और विंड एनर्जी में निवेश बढ़ाना चाहिए और साथ ही लोगों को रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स में हिस्सेदारी बनाने का मौका देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर आपको पसंद नहीं है कि ट्रम्प किस तरह तेल का उत्पादन करते हैं, तो आप उसकी शिकायत नहीं करते। आप इतनी ज्यादा सोलर और विंड एनर्जी का इस्तेमाल करते हैं कि तेल की जरूरत ही नहीं रह जाती।
गलत दावे
चुनाव लड़ने के गोत्रा के फैसले ने उनकी पुरानी सोलर कंपनी से जुड़े एक मुकदमे की ओर भी लोगों का ध्यान खींचा है। गोत्रा को उम्मीद है कि चुनाव के दौरान यह मामला चर्चा का विषय बना रहेगा।
रोड आइलैंड के अटॉर्नी जनरल ने 2023 में यह मुक़दमा दायर किया था। इसमें आरोप लगाया गया है कि गोट्रा की पुरानी कंपनी, स्मार्ट ग्रीन सोलर, और उसके CEO ने बिक्री के लिए धोखेबाजी वाले तरीके अपनाए। इनमें सोलर कॉन्ट्रैक्ट और फाइनेंशियल इंसेंटिव के बारे में ग्राहकों को गुमराह करना शामिल है। गोत्रा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित मामला बताया है और यह मुक़दमा अभी भी लंबित है।
उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए इस मामले को राजनीतिक रूप से प्रेरित "लॉ-फेयर" (कानूनी दांव-पेच) बताया और कहा कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है। उन्होंने कहा कि अगर मैंने कुछ किया होता, तो मैं खुद सबसे पहले यह बात कहता। और अगर मैंने ऐसा नहीं किया है, तो आप मुझे कभी भी यह कहने के लिए मजबूर नहीं कर पाएंगे कि मैंने ऐसा किया है।
गोत्रा ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया से निराश होने के बाद उन्होंने खुद अपना पक्ष रखने का फैसला किया। उन्होंने तर्क दिया कि सरकारी संस्थानों के खिलाफ खड़े होना उनके अभियान के पीछे के सिद्धांतों के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि इस अनुभव ने उनके इस विश्वास को और मजबूत किया कि मुश्किल समय में नेताओं को अपनी टीम के साथ खड़ा होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि नेतृत्व का मतलब है अपने लोगों के लिए खड़े होना, न कि खुद के लिए। मैं गुस्से में नहीं लड़ रहा हूं। मैं शांति और मकसद के साथ लड़ रहा हूं। उन्होंने कहा कि रोड आइलैंड के कई लोगों ने निजी तौर पर उनके अभियान का समर्थन किया है, लेकिन वे सार्वजनिक रूप से ऐसा करने से हिचकिचाते हैं क्योंकि राजनीतिक माहौल में ध्रुवीकरण बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि मैं इसे व्यक्तिगत रूप से नहीं लेता। मैं इसे दुख की बात मानता हूं।
आस्था और मकसद
गोत्रा ने कहा कि यह मेरे लिए कोई अभियान नहीं है। यह मेरे मकसद और अर्थ से भरी जिंदगी है। उन्होंने कहा कि उनका अभियान राजनीतिक महत्वाकांक्षा के बजाय आस्था और मकसद की भावना पर आधारित है।
खुद को 'एक सरदार' बताते हुए उन्होंने कहा कि अन्याय के खिलाफ खड़े होने के सिख मूल्यों ने उनके बिजनेस करियर और सार्वजनिक जीवन में आने के फैसले, दोनों का मार्गदर्शन किया है।
शुरुआती चुनौतियों ने उनके नजरिए को प्रभावित किया; आठ साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता को खो दिया और अपनी मां को परिवार का बिजनेस संभालते हुए देखा। उन्होंने बताया कि उन अनुभवों ने उनमें हिम्मत, उद्यमिता और दूसरों की सेवा करने का जज्बा पैदा किया।
गोत्रा ने अपनी दादी की एक सीख को याद करते हुए कहा- आप जलते हुए जंगल में एक फल-फूल रहा पेड़ नहीं बन सकते। यह सीख आज भी उनका मार्गदर्शन करती है। उन्होंने कहा कि यह कहावत उनके इस विश्वास को दर्शाती है कि समुदायों को एक साथ तरक्की करनी चाहिए।
रोड आइलैंड के पहले भारतीय-अमेरिकी गवर्नर बनने की कोशिश करते हुए, गोत्रा ने उम्मीद जताई कि उनका अभियान और अधिक भारतीय-अमेरिकियों को प्रेरित करेगा कि वे जनसेवा को अपने समुदायों को मजबूत करने और देश के भविष्य को आकार देने में मदद करने की एक साझा जिम्मेदारी के रूप में देखें।
रोड आइलैंड में गवर्नर पद के लिए डेमोक्रेटिक प्राइमरी 9 सितंबर को और आम चुनाव 3 नवंबर को होने हैं।
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