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भारत का UPI अब इजरायल में भी, मोदी की यात्रा के दौरान ऐतिहासिक समझौता

यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा के दूसरे और अंतिम दिन हुआ।

यूपीआई / IANS

भारत और इजरायल ने गुरुवार को अपनी डिजिटल और वित्तीय साझेदारी को और गहरा करने का ऐतिहासिक फैसला किया है। दोनों देशों ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के सीमा पार लेन-देन को सक्षम बनाने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत भारत का यूपीआई इजरायल के घरेलू भुगतान ढांचे से जुड़ेगा, जिससे डिजिटल लेन-देन तेज और अधिक किफायती हो जाएगा।

यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा के दूसरे और अंतिम दिन हुआ। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "हमने क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज पार्टनरशिप (उभरती और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी साझेदारी) स्थापित करने का फैसला किया है। यह एआई, क्वांटम और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई गति देगा।"

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उन्होंने कहा, "मुझे खुशी है कि इजरायल में यूपीआई के उपयोग के लिए एक समझौता हुआ है।" इस कदम से दोनों देशों के व्यवसायों को सरलीकृत सीमा पार भुगतान का लाभ मिलेगा, जिससे लेन-देन की लागत और निपटान समय दोनों में कमी आएगी। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि दोनों देश असैन्य परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष क्षेत्रों में भी अपने सहयोग को आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा, "हम साथ मिलकर भविष्य के लिए तैयार कृषि समाधान विकसित करेंगे और उत्कृष्टता गांवों (विलेजेज ऑफ एक्सीलेंस) के निर्माण पर काम करेंगे।"

यूपीआई की वैश्विक सफलता
यूपीआई पारिस्थितिकी तंत्र ने साबित कर दिया है कि समावेशन और पैमाना साथ-साथ चल सकते हैं और एक 'सार्वजनिक, अंतर-संचालनीय मॉडल' निजी नेटवर्क से बेहतर साबित हो सकता है। अब तक यूपीआई आठ से अधिक देशों में सक्रिय है, जिनमें संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्रांस, मॉरीशस और कतर शामिल हैं। इजरायल इस सूची में नवीनतम नाम है।

वित्त मंत्रालय द्वारा कराए गए एक स्वतंत्र अध्ययन के अनुसार, यूपीआई भारत में भुगतान का सबसे पसंदीदा माध्यम बन गया है। यह कुल भुगतान लेन-देन का 57 प्रतिशत हिस्सा है, जबकि नकद लेन-देन घटकर 38 प्रतिशत रह गया है। इसका मुख्य कारण यूपीआई का उपयोग में आसानी और त्वरित धन अंतरण की सुविधा है।

अध्ययन में यह भी सामने आया कि अब 65 प्रतिशत यूपीआई उपयोगकर्ता प्रतिदिन कई डिजिटल लेन-देन करते हैं। यूपीआई के प्रति यह झुकाव विशेष रूप से 18-25 वर्ष के युवाओं में अधिक है, जहां इसकी स्वीकार्यता 66 प्रतिशत है। यह डिजिटल-प्रथम वित्तीय आदतों की ओर एक मजबूत बदलाव को दर्शाता है।

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