कैनसस के सीनेटर रोजर मार्शल / Wikipedia
कैनसस के सीनेटर रोजर मार्शल ने 23 जून को कहा कि भारत अमेरिका के सबसे अहम रणनीतिक साझेदारों में से एक के तौर पर उभर रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि चूंकि चीन को बढ़ती आबादी और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए वॉशिंगटन को नई दिल्ली के साथ आर्थिक, सुरक्षा और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करना चाहिए।
फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज (FIIDS) द्वारा कैपिटल हिल में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए, कैनसस के रिपब्लिकन नेता ने भारत की आर्थिक तरक्की की तारीफ की, भारतीय-अमेरिकियों के योगदान को रेखांकित किया और कानूनी आव्रजन (इमिग्रेशन) व द्विपक्षीय व्यापार में सुधार की वकालत की।
मार्शल ने कहा कि भारत युवा है, तरक्की कर रहा है, लोकतांत्रिक है और हमारा साझेदार है। अमेरिका के लिए 21वीं सदी का जो रिश्ता सबसे ज्यादा मायने रखता है, वह वह नहीं है जिसे हम अभी संभाल रहे हैं। बल्कि वह है जिसे हम बना रहे हैं।
मार्शल ने दर्शकों को बताया कि भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने के लिए उनका समर्थन न केवल नीतिगत वजहों से है, बल्कि कैनसस में भारतीय-अमेरिकियों के साथ उनके व्यक्तिगत संबंधों से भी प्रेरित है।
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उन्होंने कहा कि मैं आज यहां इसलिए हूं क्योंकि मैं उस दोस्ती को बनाने में मदद करना चाहता हूं। सीनेटर ने अपने भाषण का एक बड़ा हिस्सा भारतीय-अमेरिकी समुदाय की उपलब्धियों को बताने में लगाया। मार्शल ने कहा कि भारतीय-अमेरिकी अमेरिका की कुल आबादी का 1.5% हैं। लेकिन वे हमारे कुल संघीय आयकर (फेडरल इनकम टैक्स) का 5 से 6% हिस्सा चुकाते हैं।
उन्होंने बिजनेस, चिकित्सा और उद्यमिता के क्षेत्रों में भारतीय-अमेरिकी नेतृत्व का जिक्र करते हुए कहा कि यह समुदाय बड़ी कंपनियों का नेतृत्व करता है, इनोवेशन को बढ़ावा देता है और अमेरिकी अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाता है।
उन्होंने कहाकि आप अमेरिका के इतिहास में सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे और सबसे ज्यादा कमाई करने वाले प्रवासी समुदाय हैं। मार्शल ने भारतीय-अमेरिकियों को सफल कानूनी आव्रजन का एक सशक्त उदाहरण बताया।
उन्होंने कहा कि जब भी वॉशिंगटन में कोई यह सवाल उठाता है कि क्या कानूनी इमिग्रेशन (प्रवास) काम करता है, तो आप ही उसका जवाब होते हैं। आप सिर्फ एक तर्क नहीं हैं, आप उसका जवाब हैं।
भारत की बात करते हुए मार्शल ने कहा कि देश की आर्थिक तरक्की उसे दुनिया की सबसे अहम उभरती ताकतों में से एक बनाती है। उन्होंने कहा कि भारत ने हाल ही में जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का स्थान हासिल किया है।
उन्होंने उन अनुमानों का जिक्र किया जिनके मुताबिक भारत अगले कुछ सालों में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है और आगे चलकर वैश्विक स्तर पर दूसरे स्थान पर पहुंच सकता है।
मार्शल ने भारत और चीन की डेमोग्राफिक प्रोफाइल (जनसांख्यिकीय स्थिति) की तुलना की। उन्होंने कहा कि भारत की 65 प्रतिशत आबादी 35 साल से कम उम्र की है। उन्होंने तर्क दिया कि इसके उलट, चीन को बढ़ती उम्र वाली आबादी और घटते वर्कफोर्स (कामकाजी आबादी) की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
मार्शल ने कहा कि मेरी विनम्र राय में, चीन अपनी तरक्की के शिखर पर पहुंच चुका है और अब उसका पतन शुरू हो गया है। मार्शल ने कहा कि भारत में ऐसी खूबियां हैं जो उसे अमेरिका के लिए एक स्वाभाविक साझेदार बनाती हैं।
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