बैठक में ऑस्ट्रेलिया में भारत की कार्यवाहक उच्चायुक्त इरिना ठाकुर, ब्रिस्बेन में महावाणिज्य दूत नीतू भगोतिया, ऑस्ट्रेलियाई विज्ञान अकादमी के अध्यक्ष प्रोफेसर चेन्नुपति जगदीश एसी और QUT के उप-कुलपति (अंतरराष्ट्रीय और व्यावसायिक विकास) प्रोफेसर मार्क हार्वे सहित अन्य लोग उपस्थित थे। / X/@HCICanberra
ब्रिस्बेन स्थित भारतीय उच्चायोग और भारत के महावाणिज्य दूतावास ने ऑस्ट्रेलियाई शिक्षा विभाग और क्वींसलैंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (QUT) के सहयोग से हाल ही में ब्रिस्बेन में ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के शिक्षाविदों के मंच की उद्घाटन बैठक आयोजित की।
QUT में ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के शिक्षाविदों के मंच की स्थापना भारत की उत्कृष्ट बौद्धिक परंपराओं और ऑस्ट्रेलिया के शैक्षणिक परिदृश्य के उल्लेखनीय अवसरों को सामने लाने के विचार पर आधारित है। इससे दोनों देशों के बीच शैक्षणिक संबंध और मजबूत होंगे।
इस मंच की नींव हाल ही में सिडनी में ऑस्ट्रेलिया-भारत शिक्षा एवं कौशल परिषद की एक बैठक में रखी गई, जहां भारत के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और ऑस्ट्रेलिया के शिक्षा मंत्री जेसन क्लेयर ने ऑस्ट्रेलिया के उच्च शिक्षा और अनुसंधान क्षेत्रों में प्रवासी भारतीयों की विशेषज्ञता का कुशलतापूर्वक उपयोग करने के उपायों पर चर्चा की।
Fostering education ties!
— India in Australia (@HCICanberra) November 23, 2025
The High Commission of India, Department of Education @AusGovEducation & Queensland University of Technology @QUT organized the inaugural meeting of the Forum of Academics of Indian Origin in at QUT, Brisbane.
The establishment of the… pic.twitter.com/L31hV4zgI7
ब्रिस्बेन में आयोजित फोरम की पहली बैठक में ऑस्ट्रेलिया के कई विश्वविद्यालयों के शिक्षाविदों ने भाग लिया, जिनमें STEM, मीडिया, कृषि, व्यवसाय और स्वास्थ्य सहित विभिन्न विषय शामिल थे, साथ ही दोनों सरकारों और भारतीय मिशन के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
ऑस्ट्रेलिया में भारत की कार्यवाहक उच्चायुक्त इरिना ठाकुर, ब्रिस्बेन में महावाणिज्य दूत नीतू भगोतिया, ऑस्ट्रेलियाई विज्ञान अकादमी के अध्यक्ष प्रोफेसर चेन्नुपति जगदीश एसी, और QUT के उप-कुलपति (अंतरराष्ट्रीय एवं व्यावसायिक विकास), प्रोफेसर मार्क हार्वे, सहित अन्य लोग बैठक में उपस्थित थे।
इस कार्यक्रम में तीन पैनल सत्र शामिल थे, जिनमें दुनिया भर में शैक्षणिक रणनीतियों को आकार देने वाले कारकों पर जोर दिया गया। पहले पैनल ने उभरती हुई तकनीकों और उद्योगों एवं सार्वजनिक नीति पर उनके बढ़ते प्रभाव का विश्लेषण किया, इसके बाद AI और शिक्षा एवं अनुसंधान में इसके बढ़ते उपयोग पर चर्चा हुई।
अंतिम सत्र स्वास्थ्य अनुसंधान पर था। इसमें संस्थानों के बीच सहयोग के महत्व पर ध्यान केंद्रित किया गया जो व्यापक सामाजिक प्रभाव वाली सफलताओं में योगदान देता है।
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